आइलेक्स पब्लिक स्कूल में बच्चों ने धारण किया मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का रूप
नवरात्र को लेकर आइलेक्स परिसर भक्तिमय माहौल में हुआ सराबोर, बच्चों ने संस्कृति और परंपरा को गतिविधियों के माध्यम से समझा
बरही
पंचमाधव स्थित आइलेक्स पब्लिक स्कूल में नवरात्र से पहले बच्चों ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का रूप धारण कर विद्यालय परिसर को भक्ति और आस्था से गूंजा दिया। बच्चों के आकर्षक रूप और मनमोहक प्रस्तुतियों से ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो मां दुर्गा का दरबार आइलेक्स विद्यालय के प्रांगण में ही सज गया हो। चारों ओर भक्तिमय वातावरण और उत्साह का माहौल बना रहा। बच्चों का उत्साह और उमंग देखते ही बन रहा था। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में सजे बच्चों के चेहरे की खुशी और आंखों की चमक देखते ही बन रही थी। इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवरात्र के धार्मिक महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
विद्यालय की ओर से बताया गया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। जब बच्चे अपनी संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों को गतिविधियों के माध्यम से सीखते और अनुभव करते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति की क्षमता, संस्कार और सामाजिक समझ का विकास होता है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में इस तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों में बच्चों को विद्यालय की मैनेजर डॉ. सुषमा भारती ने स्वयं तैयार किया। उनकी मेहनत और मार्गदर्शन से बच्चों का रूप अत्यंत आकर्षक और जीवंत नजर आया।
आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा और उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिला। इस अवसर पर डॉ. सुषमा भारती ने कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजन बच्चों को केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी ही नहीं देते, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और अपनी विरासत के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित करते हैं। संस्कृति केवल सिखाई नहीं जाती, बल्कि उसे बच्चों के साथ जीया और अनुभव किया जाता है।
वहीं विद्यालय के निदेशक डॉ. शैलेश कुमार ने कहा कि आइलेक्स पब्लिक स्कूल में शिक्षा के साथ बच्चों के संस्कार, व्यक्तित्व और रचनात्मक प्रतिभा के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। नवरात्र जैसे पर्व बच्चों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का बेहतर माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी बच्चों और शिक्षकों की सराहना की।
