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संगम ने वीर बाल दिवस पर संकल्प सभा का आयोजन किया

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संगम ने वीर बाल दिवस पर संकल्प सभा का आयोजन किया

वीरता और नैतिकता की सीख बालकों को बचपन से ही दी जानी चाहिए : बटेश्वर प्रसाद मेहता

हजारीबाग

वीर बाल दिवस पर सागर भक्ति संगम के तत्वाधान में स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में संकल्प सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु गोविंद सिंह पर आधारित गीत से हुआ । संगम ने देश के प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को प्रेषित एक पत्र के माध्यम से मांग किया है कि सिख पंथ के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों की शहादत की कहानी को देशभर के स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। इस अवसर पर संगम के सदस्यों ने अपने-अपने परिवार के बच्चों को वीरता और नैतिकता की सीख देने का संकल्प लिया।

झारखंड स्वाधीनता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता कहा कि गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्रों क्रमशः अजीत सिंह, जुझार सिंह, फतेह सिंह और जोरावर सिंह ने हिंदू सनातन धर्म की रक्षार्थ जो शहादत दी थी, सदा याद किया जाता रहेगा । वीरता और नैतिकता की सीख बालकों को बचपन से ही दी जानी चाहिए। कथाकार विजय केसरी ने कहा कि आज के बदली राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति में जिस प्रकार विदेशी शक्तियां देश की एकता और अखंडता को ध्वस्त करने में लगी हुई है, ऐसे में देश के हर परिवार के लोगों को अपने बच्चों को गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों की शहादत की कहानी बतानी चाहिए। शिक्षाविद केसी मेहरोत्रा ने कहा कि वीर बालक दिवस यह बताता है कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों ने जो शहादत दिया, अतुलनीय है। इस शहादत पर सदैव देशवासियों को गर्व रहेगा। समाजसेवी सह व्यवसायी सतीश होर्रा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर सिंह की तीन पीढ़ी हिंदू सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था।

शिक्षाविद ब्रजनंदन प्रसाद ने कहा कि गुरु तेग बहादुर के परिवार की शहादत पर देशवासियों को हमेशा गर्व होगा। 1705 में चमकौर की लड़ाई में कब सेना रहने के बावजूद गुरु गोविंद सिंह ने औरंगजेब की सेना को बहुत दूर तक खदेड़ दिया था। समाजसेवी सह व्यवसायी संजय खत्री ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह की सेना, औरंगजेब की सेना के मुकाबले बहुत कम थी,लेकिन उनके पास अदम्य साहस का जज्बा था। आज देशवासियों को उनके अदम्य साहस और शहादत से सीख लेनी चाहिए। आयोजित कार्यक्रम में सुरेंद्र गुप्ता पप्पू , मनोज गुप्ता, अजीत गुप्ता, अखिलेश सिंह, कृष्ण मुरारी गुप्ता, राणा राहुल प्रताप, बीना अखौरी, उषा सहाय, गोपी कृष्ण सहाय, इंद्र सोनी, अजीत विश्वकर्मा, शंभू शरण सिन्हा, अशोक राणा, मिथुन राणा, महावीर ठाकुर, सुरेश मिस्त्री आदि सम्मिलित हुए।

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