विस्थापित परिवारों को उनका हक दिलाने के लिए आगे आए कांग्रेस स्टेट कोऑर्डिनेटर विनोद कुशवाहा
कोनार डैम, छड़वा डैम, बड़कागांव सहित अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों को उचित मुआवजा देने की उठाई मांग
हजारीबाग
झारखंड में विकास परियोजनाओं, डैम निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण विस्थापित हुए परिवारों को उनका वाजिब हक दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस स्टेट कोऑर्डिनेटर विनोद कुमार ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास के नाम पर कई परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन, घर और आजीविका से हाथ धोना पड़ा है, लेकिन आज भी अनेक विस्थापित परिवार उचित मुआवजे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
विस्थापन का दर्द झेल रहे इन परिवारों की समस्याओं का समाधान करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। विनोद कुशवाहा ने कोनार डैम, छड़वा डैम, बड़कागांव सहित झारखंड की अन्य परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास योजनाओं के निर्माण के दौरान जिन लोगों की जमीन और संपत्ति का अधिग्रहण किया गया, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा मिलनी चाहिए। लेकिन कई परिवार आज भी अपनी मांगों को लेकर परेशान हैं। वर्षों बीत जाने के बावजूद यदि विस्थापित परिवारों को उनका अधिकार नहीं मिलता है, तो यह उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से नहीं मापी जानी चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उस परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले लोगों को न्याय मिला या नहीं। डैम, उद्योग और अन्य बड़ी परियोजनाओं के निर्माण से सरकार तथा समाज को लाभ मिलता है, लेकिन इसके लिए अपनी जमीन और घर छोड़ने वाले परिवारों को भी विकास का लाभ मिलना चाहिए। विस्थापित परिवारों की अनदेखी करके समावेशी विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
कांग्रेस स्टेट कोऑर्डिनेटर विनोद कुशवाहा ने कंपनियों द्वारा भूमि अधिग्रहण किए जाने के बाद प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलने की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां खनिज संपदा, उद्योग और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भूमि की आवश्यकता होती है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय रैयतों, किसानों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जमीन किसी भी परिवार के लिए केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि वह उसकी आजीविका, सामाजिक पहचान और भविष्य की सुरक्षा का आधार भी होती है।
जब किसी परिवार की जमीन अधिग्रहित की जाती है, तो उसके सामने रोजगार, बच्चों की पढ़ाई, आवास और आर्थिक सुरक्षा जैसी अनेक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। इसलिए कंपनियों और संबंधित प्राधिकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा मिले और पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों का पालन किया जाए। विनोद कुशवाहा ने केंद्र सरकार से विस्थापित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नीति लागू करने और मौजूदा कानूनी प्रावधानों को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
