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झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का वार्षिक उत्सव 11 अक्टूबर को होगा आयोजित
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
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झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का वार्षिक उत्सव 11 अक्टूबर को होगा आयोजितग्रामीण क्षेत्र में साहित्य और संस्कृति का प्रचार प्रसार और नई प्रतिभाओ की खोज और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए बिगत 24 सितम्बर 2004 को नुआग्राम प्रार्थमिक विद्यालय में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद की स्थापना की गई थी।स्वर्गीय जगदीश महापात्र को अध्यक्ष, शंकर चंद्र गोप को सचिव और सुनील कुमार दे को कोषाध्यक्ष के रुप में चुना गया था।उसदिन पत्रकार बीरेंद्र सिंह,बबलू दास,विश्वामित्र खंडायत, मिथुन साहू,दुलाल चंद्र दास,सुदीप मुखर्जी,माणिक महतो,बिनोद ज्योतिषी आदि उपस्थित थे।उसी बर्ष दुर्गापूजा के बाद नुआग्राम प्रार्थमिक विद्यालय में पहला साहित्य और संस्कृति सम्मेलन का आयोजन भी किया गया था।परिषद का उद्देश्य था सभी भाषा और संस्कृति को एक मंच पर लाना,सभी साहित्य और संस्कृति को सम्मान देना,छिपी हुई साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतिभाओ की खोज करना और उन्हें प्रोत्साहित करना,साहित्यकारों,कलाकारो,शिक्षको और मैट्रिक टॉपरों को सम्मानित करना, समय समय पर साहित्य सम्मेलन, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक सम्मेलन आदि करना,पत्र पत्रिका और पुस्तक का प्रकाशन करना,साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भाईचारा,प्रेम,साम्प्रदायिक सद्भाव और देश प्रेम को जागृत करना आदि था।2005 से बहुभाषी साहित्यिक पत्रिका ,झारखंड प्रभा,का प्रकाशन शुरू हुआ था जो आज तक अपना पहचान बनाए रखा है,ओर इस पत्रिका के संपादक सुनील कुमार दे थे।विगत 15 साल तक परिषद का कार्यक्रम चला।14 साल तक झारखंड प्रभा का प्रकाशन भी हुआ।2017 में सुनील कुमार दे का हार्ट का ऑपरेशन हुआ और उसी साल से शंकर चंद्र गोप भी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गए।2018 के बाद परिषद का कार्यक्रम और झारखंड प्रभा का प्रकाशन बंद हो गया।2018 में झारखंड प्रभा का 14 वा अंक का प्रकाशन हुआ था।उसके बाद 2019 से कॅरोना भी आ गई इसलिए 2019,2020 और 2021 को झारखंड प्रभा का प्रकाशन नहीं हुआ।बहुभाषी झारखंड प्रभा भाषाई एकता का मिशाल है इसलिए नई पीढ़ी इसको फिर से शुरू करने की इच्छा जताई।इसलिए 2022 में फिर से झारखंड प्रभा का प्रकाशन करने का निर्णय लिया गया।2022 में परिषद का भी पुर्नगठन भी किया गया जिसमें भवतारण मंडल को अध्यक्ष, शंकर चंद्र गोप को सचिव, राजकुमार साहू को कोषाध्यक्ष और सुनील कुमार दे को संपादक बनाया गया।2022 में झारखंड प्रभा का 15 वा अंक का प्रकाशन हुआ।पत्रिका का विमोचन बिगत 25 सितम्बर 2022 को कापड़ गादी घाट के माँ रुंकिनी मंदिर परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन के द्वारा किया गया था ।2023 में झारखंड प्रभा का 16 वा अंक का प्रकाशन बाद 2024 में सुनील कुमार दे की अश्वस्थता के कारण फिर प्रकाशन बंद हो गया।2025 में पिछली गांव में साहित्य संस्कृति सम्मेलन में झारखंड प्रभा फिर से निकालने का निर्णय लिया गया।बिगत 21 सितम्बर 2025 को झारखंड प्रभा का 17 वा अंक का प्रकाशन महालया के दिन माताजी आश्रम में हुआ।उसदिन परिषद का 22 वाँ वार्षिक उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया।इस वर्ष झारखण्ड प्रभा का 18 वां अंक का प्रकाशन आगामी 11 अक्टूबर को माताजी आश्रम में किया जायेगा। उसी दिन परिषद का 23 वां वार्षिक उत्सव भी मनाया जायेगा। इस वर्ष साहित्यिक प्रतिभा खोज के लिए कुल 31 स्कूल और कॉलेज में अभियान चलाया गया। कुल 12 स्कूल और कॉलेज में प्रथम चरण में साहित्यिक प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया तथा दूसरा चरण में 2 अगस्त को माताजी आश्रम में 12 विद्यालय के सफल प्रतिभागियों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया उनमें से कुल 15 प्रतिभा शाली छात्र छात्राओं का चयन किया गया जिन्हे आगामी 11 अक्टूबर को माताजी आश्रम परिसर में पुरस्कृत किया जायेगा। इसके अलावे उसी दिन चार बिभूतियों को विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए नित्यानंद मण्डल स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।
