नवरात्र शुरू होते ही जगड़ा-जोगीडीह में मांस-मदिरा पर प्रतिबंध, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम
इचाक
नवरात्र शुरू होते ही हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड अंतर्गत जगड़ा-जोगीडीह गांव में मांस-मदिरा के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा का ग्रामीण आज भी पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हैं। धार्मिक आस्था, सामाजिक अनुशासन और नशे से दूरी का संदेश देने वाली यह परंपरा गांव की विशिष्ट पहचान बन गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, हिंदी पंचांग के अश्विन माह की शुरुआत होते ही गांव में मांस-मदिरा का सेवन वर्जित माना जाता है। परंपरा का उल्लंघन करने वालों के लिए आर्थिक और सामाजिक दंड का भी प्रावधान है। ग्रामीण सामूहिक सहमति से इस परंपरा को निभाते हुए नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना में जुट जाते हैं।
कलश स्थापना के साथ नवरात्र पूजा शुरू नवरात्र के पहले दिन गांव में कलश स्थापना के साथ पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने कलश लेकर पूरे गांव का भ्रमण किया। इसके बाद छोटकी नदी के तट पर पहुंचकर कलश में जल भरा और वापस दुर्गा मंडप पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूरे नवरात्र गांव में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा- पाठ का आयोजन जारी रहेगा।
आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है परंपरा गांव के पूर्व मुखिया बसंत मेहता ने कहा कि इस परंपरा का उद्देश्य केवल धार्मिक नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन और आपसी सहमति को बनाए रखना भी है। वहीं, समाजसेवी पंकज कुमार ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और जल यात्रा के साथ पूजा की शुरुआत की गई। ग्रामीण पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं।
समाजसेवी बटेश्वर मेहता ने कहा कि आधुनिक दौर में भी जगड़ा-जोगीडीह के ग्रामीणों द्वारा सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखना आस्था, सामाजिक एकजुटता और नशे से दूरी का संदेश देता है।
कलश स्थापना एवं जल यात्रा में पुरोहित योगेंद्र मिश्रा, पुजारी सेवा महतो, दाखो देवी, ब्रजेश मेहता, संगीता देवी, पूजा समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार मेहता, सचिव सोनू मिश्रा, कोषाध्यक्ष पिंटू कुमार, मंटू कुमार मेहता, सुजीत कुमार मेहता, मनोज कुमार मेहता, सतीश कुमार, टुनटुन कुमार, सचिन कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
