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कानून पब्लिकेशन ने एविडेंस एंड जस्टिस विषय पर आयोजित किया लीगल सेशन

हंसराज चौरसिया
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कानून पब्लिकेशन ने एविडेंस एंड जस्टिस विषय पर आयोजित किया लीगल सेशन

 

न्यायालय में साक्ष्यों की सही पहचान, उनका विधिसम्मत प्रस्तुतिकरण और निष्पक्ष मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है- सोनाली भट्टाचार्जी 

 

रांची-

 

न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की भूमिका और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में एविडेंस लॉ के महत्व को लेकर कानून पब्लिकेशन की ओर से सोमवार को एविडेंस एंड जस्टिस विषय पर विशेष लीगल सेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों और कानून के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान साक्ष्यों की प्रासंगिकता, विश्वसनीयता, न्यायालय में उनकी प्रस्तुति और उनके न्यायिक मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सेशन में वक्ताओं ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी मामले की वास्तविकता तक पहुंचने में साक्ष्य की भूमिका केंद्रीय होती है। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रत्येक साक्ष्य का मूल्यांकन उसकी प्रासंगिकता, विश्वसनीयता और कानूनी स्वीकार्यता के आधार पर किया जाता है। ऐसे में एविडेंस लॉ की स्पष्ट एवं व्यावहारिक समझ अधिवक्ताओं और विधि के विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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झारखंड उच्च न्यायालय की अधिवक्ता सोनाली भट्टाचार्जी ने कहा कि न्याय की मजबूत नींव विश्वसनीय और विधिसम्मत साक्ष्य पर टिकी होती है। साक्ष्य केवल किसी मामले को साबित करने का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में साक्ष्यों की सही पहचान, उनका विधिसम्मत प्रस्तुतिकरण और निष्पक्ष मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं को एविडेंस लॉ के केवल सैद्धांतिक पक्ष तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

 

न्यायालय में साक्ष्यों का किस प्रकार प्रस्तुतिकरण किया जाता है, उनकी विश्वसनीयता किस तरह परखी जाती है और उनका न्यायिक निर्णय पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसकी व्यावहारिक समझ भी आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने साक्ष्य कानून से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक एवं न्यायिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

 

सवाल-जवाब के माध्यम से भी कई महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं पर चर्चा हुई। सेशन में मौजूद विधि विद्यार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन उन्हें कानून की किताबों में पढ़े गए विषयों को न्यायिक प्रक्रिया के वास्तविक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान करते हैं। कानून पब्लिकेशन की ओर से बताया गया कि विधि एवं न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों पर भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसे ज्ञानवर्धक लीगल सेशन आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य विधि के क्षेत्र में अध्ययन, शोध, संवाद और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना है, ताकि कानून से जुड़े लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के बदलते स्वरूप और महत्वपूर्ण कानूनी विषयों की बेहतर समझ मिल सके।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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