Ad image

शिक्षक उस दीपक के समान हैं जो स्वयं जलकर दूसरों का जीवन आलोकित करते हैं – आलोक कुमार बरनवाल

हंसराज चौरसिया
1 Min Read
WhatsApp Group Join Now

बरही-

शिक्षक दिवस के अवसर पर मॉडर्न पब्लिक स्कूल बुंडू एवं सरस्वती विद्यापीठ कोचिंग सेंटर बरही के विज्ञान शिक्षक आलोक कुमार बरनवाल ने कहा कि शिक्षा ही मानव जीवन को प्रकाशमय बनाती है और शिक्षक उस दीपक के समान हैं जो स्वयं जलकर दूसरों का जीवन आलोकित करते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि उन्होंने शिक्षा को समाज सेवा और चरित्र निर्माण का माध्यम बताया था। आज के समय में भी शिक्षक का कार्य केवल पढ़ाना भर नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की सही दिशा देना और उनमें राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना है। श्री बरनवाल ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है, जिसमें गुरु केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि संस्कार भी प्रदान करता है। विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज और देश का नाम रोशन करें।

Share This Article
राज्य प्रभारी
Follow:
हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *