वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेला में उपायुक्त ने वृक्षों को बांधी राखी, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का दिया संदेश
वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेला में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, उपायुक्त ने कहा– पर्यावरण बचाना सभी की जिम्मेदारी
हजारीबाग |
उपायुक्त हेमन्त सती बुधवार को दूधमटिया, टाटीझरिया में आयोजित वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेला में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मेले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वृक्षों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार हैं।
उपायुक्त ने मेला परिसर में स्कूली बच्चों द्वारा जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को लेकर लगाए गए विभिन्न स्टॉल का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए उनके द्वारा प्रस्तुत कला, रचनात्मकता एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों की सराहना की तथा पर्यावरण के प्रति बच्चों की जागरूकता को समाज के लिए सकारात्मक पहल बताया।
इसके उपरांत मंच पर जिला पर्यावरण समिति के सदस्यों द्वारा उपायुक्त श्री हेमन्त सती का स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने उन्हें शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया।
पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी, प्रत्येक नागरिक निभाए अपनी भूमिका : उपायुक्त
मेला को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री हेमन्त सती ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से श्री महादेव महतो द्वारा शुरू की गई वृक्षों के रक्षाबंधन की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण के लिए हमें अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी आवश्यक बदलाव लाने होंगे। वृक्षों की रक्षा एवं अधिक से अधिक पौधरोपण के साथ-साथ जलस्रोतों, जंगलों, पहाड़ों, झरनों, नदियों, झीलों तथा वन्यजीवों का संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। पर्यावरण का संरक्षण तभी प्रभावी होगा, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसके प्रति संवेदनशील होकर अपनी भूमिका निभाए।
उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के अधिक करीब हैं। ग्रामीण समुदाय पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्थानीय स्तर पर जंगलों एवं जलस्रोतों की रक्षा, वृक्षों का संरक्षण तथा वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह निरंतर चलने वाला जन-अभियान है। बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना इस दिशा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की जागरूक पीढ़ी ही आने वाले समय में प्रकृति के प्रति जिम्मेदार समाज का निर्माण करेगी।
उपायुक्त ने कहा कि आने वाले समय में जिले में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता आधारित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता है। इन प्रयासों में जिला प्रशासन की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें, अनावश्यक रूप से पेड़ों की कटाई न होने दें तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए दूसरों को भी जागरूक करें।
विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेला में स्कूली बच्चों के लिए क्विज, निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं झांकियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के संदेश प्रस्तुत किए गए।
मेला परिसर में सरकारी, गैर-सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विभिन्न जागरूकता स्टॉल लगाए गए। इस दौरान वृक्षों का रक्षाबंधन किया गया तथा बीएसएफ मेरु द्वारा बैंड की प्रस्तुति दी गई।
जिला जनसंपर्क कार्यालय के सौजन्य से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक एवं एलईडी स्क्रीन के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए गए। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक सहभागिता एवं प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने का संदेश दिया गया।
