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एक कोस में बदल जाती है वाणी! जयराम महतो का बड़ा दांव—गांव-गांव होगा भाषाई सर्वे, प्रखंड स्तर पर तय होगी भाषा

जयराम महतो ने कहा कि एक-एक अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था की कथित खामियों को सामने ला रहा है और सरकार को इन गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।

हंसराज चौरसिया
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  • जयराम महतो
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एक कोस में बदल जाती है वाणी! जयराम महतो का बड़ा दांव—गांव-गांव होगा भाषाई सर्वे, प्रखंड स्तर पर तय होगी भाषा

 

पलामू में गरजे डुमरी विधायक, भाषा मित्रों की अगुवाई में बने विशेषज्ञ टीम, सरकार को सौंपे रिपोर्ट, JPSC-JSSC पर भी हमला—धन के लालच ने परीक्षाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया

 

मेदिनीनगर।

 

झारखंड में भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो ने ऐसा सुझाव दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य की भाषाई राजनीति गरमा सकती है। पलामू पहुंचे जयराम महतो ने कहा कि झारखंड में भाषा का फैसला बंद कमरों में नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर जनता की जुबान सुनकर होना चाहिए।

 

मंगलवार को मेदिनीनगर में प्रमंडलीय कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद पलामू सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए जयराम महतो ने कहा कि भाषा मित्रों के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की जाए। इस टीम में भाषा के क्षेत्र में काम करने वाले जानकारों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। टीम झारखंड के गांव-गांव पहुंचे और सर्वे कर यह पता लगाए कि किस इलाके में ग्रामीण वास्तव में कौन-सी भाषा बोलते हैं।

 

एक कोस में पानी-वाणी बदल जाती है—बयान ने पकड़ा तूल

 

जयराम महतो ने कहा कि पलामू जैसे बड़े जिले में एक ही भाषा को पूरे जिले पर लागू करना उचित नहीं होगा। पलामू में 21 प्रखंड हैं, इसलिए भाषा का चयन भी प्रखंड स्तर पर होना चाहिए।

 

उन्होंने कहा—एक कोस में पानी और वाणी बदल जाती है।

 

जयराम महतो के इस बयान ने भाषा चयन को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। उनका कहना है कि पहले जमीनी सर्वे हो, फिर रिपोर्ट तैयार की जाए और उसी के आधार पर सरकार भाषा को लेकर निर्णय ले। यानी भाषा का फैसला आंकड़ों और जमीनी हकीकत के आधार पर हो, राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं।

 

JPSC-JSSC पर भी फूटा गुस्सा, बोले—परीक्षाएं सवालों के घेरे में

 

भाषा के बाद जयराम महतो ने JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर भी सरकार और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि धन का लालच परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।

 

उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेट और नेता मंच से कहते हैं कि कफन में जेब नहीं होती, लेकिन दूसरी तरफ इतना धन जमा करने की होड़ है, जिसका इस्तेमाल व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी नहीं कर सकता।

 

एक-एक अभ्यर्थी खोल रहा है पोल

 

जयराम महतो ने कहा कि कई परीक्षाएं सवालों के घेरे में हैं और एक-एक अभ्यर्थी व्यवस्था की कथित खामियों को सामने लाने में लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धन का लालच पूरी परीक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

 

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात पहुंचाने की कोशिश हो रही है और बेशर्मी के साथ सरकार चलाई जा रही है।

 

भाषा के सवाल पर गांव की जुबान से लेकर परीक्षाओं की पारदर्शिता तक—पलामू से जयराम महतो ने एक साथ कई ऐसे मुद्दे उठा दिए हैं, जिन पर अब सरकार को जवाब देना पड़ सकता है।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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