कोनबीर खुदी चौक पर ओबीसी समाज का चक्का जाम, झारखंड-ओडिशा मुख्य पथ पर थमे वाहनों के पहिए
ओबीसी आरक्षण और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग को लेकर सड़क पर उतरा समाज, चक्का जाम से यातायात ठप, बंद के समर्थन में दुकानें-प्रतिष्ठान भी रहे बंद
बसिया। प्रतिनिधि।
आदित्य ओहदार
ओबीसी समाज के आरक्षण, अधिकार और आबादी के अनुपात में उचित हिस्सेदारी की मांग को लेकर मंगलवार को बसिया प्रखंड के कोनबीर खुदी चौक पर बंद और चक्का जाम का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति के आह्वान पर आयोजित आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के लोग सड़क पर उतर आए। कोनबीर खुदी चौक पर चक्का जाम किए जाने से झारखंड-ओडिशा मुख्य पथ पर वाहनों के पहिए थम गए। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई।
आंदोलन का असर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। बंद के समर्थन में कोनबीर और आसपास के क्षेत्र की दुकानें एवं विभिन्न प्रतिष्ठान बंद रहे। बाजार में सामान्य दिनों की अपेक्षा सन्नाटा पसरा रहा और कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा। सड़क पर चक्का जाम और बाजार में बंद के कारण आम जनजीवन पर भी इसका असर देखने को मिला।
चक्का जाम से सड़क पर लगी वाहनों की कतार
कोनबीर खुदी चौक पर आंदोलनकारियों के सड़क पर उतरने के बाद झारखंड-ओडिशा मुख्य पथ पर आवागमन बाधित हो गया। बस, ट्रक, चारपहिया और अन्य वाहनों की आवाजाही रुकने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई यात्री और वाहन चालक जाम में फंसे रहे। मुख्य मार्ग से गुजरने वाले लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
चक्का जाम के कारण स्थानीय स्तर पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित नजर आई। वहीं बंद के कारण बाजार की दुकानें बंद रहने से खरीद-बिक्री और रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
पांच जिलों में बंद और चक्का जाम का आह्वान
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने ओबीसी समाज के अधिकारों और मांगों को लेकर गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रांची और लोहरदगा जिलों में बंद एवं चक्का जाम का आह्वान किया था। इसी क्रम में बसिया के कोनबीर खुदी चौक पर भी आंदोलन किया गया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि ओबीसी समाज को उसकी आबादी के अनुपात में शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में उचित आरक्षण एवं हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि समाज की वास्तविक आबादी और उसके अनुरूप प्रतिनिधित्व को लेकर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
आरक्षण के मुद्दे पर सड़क पर गूंजे नारे
प्रदर्शन के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई। आंदोलनकारियों ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उचित आरक्षण लागू करने की मांग की। कुछ क्षेत्रों में ओबीसी आरक्षण को कथित रूप से कम या शून्य किए जाने का भी विरोध किया गया।
आंदोलनकारियों का कहना था कि ओबीसी समाज को उसकी आबादी के अनुपात में अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर बंद और चक्का जाम के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया गया।
जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम की मांग
आंदोलन में जनगणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ओबीसी समाज की ओर से मांग की गई कि जनगणना में ओबीसी जातियों के लिए अलग से कॉलम शामिल किया जाए। आंदोलनकारियों के अनुसार, ओबीसी समाज की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आने के बाद ही आरक्षण, प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी से संबंधित नीतियों को आबादी के अनुपात में निर्धारित किया जा सकेगा।
पेसा कानून को लेकर भी उठी आवाज
प्रदर्शन के दौरान पेसा कानून के तहत अधिकार देने की मांग भी उठाई गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि विकास और शासन व्यवस्था में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से ओबीसी समाज से जुड़े अधिकारों और मांगों पर उचित पहल करने की अपील की।
एक दिन पहले निकला था मशाल जुलूस
बंद से एक दिन पहले सोमवार की शाम आंदोलन को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में मशाल जुलूस निकाला गया था। मशाल जुलूस के माध्यम से लोगों को ओबीसी समाज के अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया और मंगलवार के बंद एवं चक्का जाम को सफल बनाने की अपील की गई थी।
मंगलवार को इसका असर कोनबीर खुदी चौक पर दिखाई दिया। सड़क पर चक्का जाम के साथ बाजार की दुकानें भी बंद रहीं। इससे एक ओर जहां मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कारोबार पर भी बंद का असर पड़ा।
सड़क जाम और बाजार बंद से जनजीवन प्रभावित
चक्का जाम के कारण झारखंड-ओडिशा मुख्य पथ से गुजरने वाले यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी हुई। लंबी दूरी के यात्री जाम में फंसे रहे, जबकि स्थानीय लोगों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रहने से बाजार में सामान्य गतिविधियां ठप रहीं।
आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकार, आरक्षण, प्रतिनिधित्व और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग को लेकर है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
