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डॉ. भैरव यादव को मिली पीएचडी उपाधि, सयुंक्त बिहार के स्वतंत्रता संग्राम में बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और छात्रों की भूमिका पर किया अध्ययन

हंसराज चौरसिया
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हजारीबाग-

यह गर्व का विषय है कि हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के शोधकर्ता डॉ. भैरव यादव ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनके शोध का विषय था स्वतंत्रता संग्राम में सयुंक्त बिहार के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों एवं छात्रों की भूमिका एक अध्ययन (1917-1947)। शोध में डॉ. यादव ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सयुंक्त बिहार क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का गहन अध्ययन किया। इस कार्य में उन्होंने यह विश्लेषण किया कि किस प्रकार बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और छात्रों ने स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में सक्रिय भूमिका निभाई। शोध में स्थानीय आंदोलनों, पब्लिक डिबेट्स, शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका, साहित्य और पत्रिकाओं के माध्यम से राजनीतिक चेतना के प्रसार को भी ऐतिहासिक साक्ष्यों के जरिए उजागर किया गया। डॉ. यादव ने इस शोध में प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों का व्यापक उपयोग किया। इसमें समकालीन पत्र-पत्रिकाएं, सरकारी अभिलेख, स्वतंत्रता सेनानी जीवनी और मौखिक इतिहास शामिल हैं। विशेष रूप से उन्होंने कई अप्रकाशित दस्तावेजों पर ध्यान केंद्रित किया, जो अब तक इतिहासकारों की दृष्टि से अनदेखे रहे थे। इस दृष्टिकोण से उनका शोध स्वतंत्रता संग्राम के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। अंतिम मौखिकी परीक्षा 26 अगस्त 2025 को संपन्न हुई, जिसके बाद उन्हें पीएचडी उपाधि से सम्मानित किया गया।

उनके मार्गदर्शक डॉ. श्यामकिशोर सिंह, मार्कहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, हजारीबाग ने उन्हें मूल्यवान सुझाव और मार्गदर्शन प्रदान किया। इस उपलब्धि पर डॉ. भैरव यादव ने कहा, यह शोध केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। मेरा उद्देश्य यह दिखाना था कि शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और छात्रों ने मिलकर न केवल राजनीतिक क्रांति में योगदान दिया, बल्कि सामाजिक चेतना के माध्यम से एक नया भारत बनाने का प्रयास भी किया। मैं अपने मार्गदर्शकों, परिवार और सभी सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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