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झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा पर संकट, कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से बढ़ सकती है मरीजों की परेशानी

हंसराज चौरसिया
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झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा पर संकट, कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से बढ़ सकती है मरीजों की परेशानी

 

वेतन भुगतान, बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और ईपीएफ-ईएसआई समेत कई मांगों पर अड़े कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग के साथ वार्ता बेनतीजा, झारखंड न्यूज़24 पहले भी प्रमुखता से दिखा चुका है यह मुद्दा

 

रांची।  झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने बुधवार, 21 अक्टूबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले को बरकरार रखा है। स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ता में सभी मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। ऐसे में हड़ताल का असर राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी बढ़ सकती है।

 

108 एंबुलेंस कर्मचारियों की लंबित मांगों और उनके आंदोलन से जुड़े मुद्दे को झारखंड न्यूज़24 पहले भी प्रमुखता से उठा चुका है। कर्मचारियों की समस्याओं और आंदोलन के कारण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर पहले भी खबर प्रकाशित की गई थी। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल के फैसले ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। एक ओर कर्मचारी अपने अधिकारों और लंबित भुगतान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोगों की निर्भरता इस आपातकालीन सेवा पर बनी हुई है।

 

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित वेतन का भुगतान, सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और श्रमिकों को वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराना शामिल है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), ओवरटाइम भुगतान, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसे अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग भी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं और बार-बार मांग उठाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया है। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

 

कर्मचारी 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराने और वेतन भुगतान की व्यवस्था सरकारी स्तर पर सुनिश्चित करने की मांग भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि सेवा के संचालन और कर्मचारियों के भुगतान को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था होने से समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सकता है। हालांकि, इन मांगों पर सरकार और कर्मचारी संघ के बीच अब तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है।

 

कर्मचारियों की मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में वार्ता हुई थी, लेकिन सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन वापस लेने का रास्ता नहीं निकल सका। इसके बाद कर्मचारी संघ ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले को बरकरार रखा। इससे पहले भी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन कर चुके हैं। 15 अक्टूबर की रात से 17 अक्टूबर तक कार्यबंदी के कारण कई स्थानों पर एंबुलेंस सेवाएं प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। उस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा था। अब अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा के बाद लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

 

108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने से लेकर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तक इस सेवा की अहम भूमिका है। ऐसे में यदि हड़ताल व्यापक रूप से प्रभावी होती है, तो मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई हो सकती है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि वहां निजी वाहन या परिवहन के अन्य साधन तत्काल उपलब्ध होना हमेशा संभव नहीं होता।

 

हालांकि, फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह बंद हो गई है। अलग-अलग जिलों में एंबुलेंस के परिचालन की स्थिति अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, गिरिडीह में 16 अक्टूबर को जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने जिले की 39 एंबुलेंस के सामान्य रूप से संचालित होने की जानकारी दी थी। ऐसे में राज्यभर में सेवा की वास्तविक स्थिति का आकलन जिलावार परिचालन और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।

 

सरकार की ओर से पहले कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर काम पर लौटने की अपील किए जाने की जानकारी सामने आई थी। मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में कार्रवाई और वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही गई थी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को चालू रखने के लिए क्या कदम उठाती है और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए आगे क्या पहल करती है।

 

फिलहाल, 108 एंबुलेंस कर्मचारियों का आंदोलन और सरकार के साथ जारी गतिरोध झारखंड की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सहमति बनना जरूरी है, ताकि उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान हो सके और आम लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलती रहे।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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