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हजारीबाग सदर अनुमंडल में धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू

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हजारीबाग-

ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर जिले में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक हजारीबाग के संयुक्त आदेश के आलोक में सदर अनुमंडल क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।अनुमंडल दंडाधिकारी बैद्यनाथ कामती (प्रभारी), सदर हजारीबाग ने बताया कि यह निषेधाज्ञा 4 सितम्बर की सुबह 6 बजे से प्रभावी होकर 6 सितम्बर तक लागू रहेगी। इस दौरान पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह बनाना वर्जित होगा। सोशल मीडिया या अन्य किसी भी माध्यम से भड़काऊ संदेश, वीडियो या ऑडियो प्रसारित करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घातक हथियार, आग्नेयास्त्र या लाठी-डंडा लेकर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि लाउडस्पीकर के माध्यम से किसी भी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले भाषण नहीं दिए जा सकेंगे। बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का जुलूस या प्रदर्शन भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, यह प्रतिबंध पुलिस बल, पदाधिकारी, ड्यूटी पर तैनात कर्मी, शादी-विवाह और शव यात्रा पर लागू नहीं होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और अफवाहों से दूर रहें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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