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भारत-जापान की नई उड़ान

हंसराज चौरसिया
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सेन्ट्रल डेस्क-

टोक्यो की धरती पर गूँजी पुकार,
भारत-जापान का हुआ नया संचार।
दिल्ली से टोक्यो, वाराणसी से क्योटो,
सभ्यताओं का संगम बना अनुपम फोटो।

इतिहास की गहराई, भविष्य का रंग,
दोस्ती की राह पर कदमों का संग।
तकनीक मिले जब युवा उमंगों से,
नवाचार झरेगा सपनों की तरंगों से।

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File Photo

राज्य और प्रान्त अब हाथ मिलाएँ,
जन-जन के रिश्ते नए दीप जलाएँ।
व्यापार, शिक्षा, संस्कृति का संगम,
शांति का संदेश बनेगा आलम।

गंगा की धार क्योटो तक जाए,
बुद्ध की करुणा समुराई गुनगुनाए।
युवाओं की शक्ति, जापान का विज्ञान,
मिलकर रचेंगे एशिया का नया गगन।

अमित कुमार
अमित कुमार
स्तंभकार

यह सिर्फ समझौता नहीं,
यह दोस्ती का गीत है,
यह सिर्फ निवेश नहीं,
यह मानवता का मीत है।

भारत-जापान की ये उड़ान,
ले जाएगी ऊँचाइयों की ओर,
भविष्य की रचना होगी नई,
एशिया गाएगा शांति का कोर।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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