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आफत बनी बारिश, झारखंड में जनजीवन अस्त-व्यस्त, 2 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी

हंसराज चौरसिया
3 Min Read
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रांची-

झारखंड में इस बार मानसून वरदान के बजाय आफत बनकर बरस रहा है। लगातार बारिश ने पूरे राज्य में हालात बिगाड़ दिए हैं। नदी-नालों से लगे निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। कई बड़े अपार्टमेंट्स के बेसमेंट जलमग्न हैं, जिससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों परेशान हैं। विधानसभा में भी यह मुद्दा गूंजा, जहां जानकारी दी गई कि अतिवृष्टि के कारण सैकड़ों कच्चे मकान ढह चुके हैं। पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में दलहन की फसल चौपट हो गई है। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। उधर, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। हाल यह है कि शायद ही कोई घर ऐसा हो जो डायरिया, वायरल फीवर या मलेरिया से अछूता हो। लोग धूप की एक किरण का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद नहीं जताई है। 30 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी जारी की हैं। मौसम केंद्र, रांची ने साफ कर दिया है कि 30 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में हालात और बिगड़ सकते हैं। रांची, गुमला, बोकारो, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा, धनबाद, पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के झोंकों और वज्रपात के साथ भारी बारिश की आशंका है। 31

अगस्त से 2 सितंबर तक राज्य अलर्ट पर
अगस्त का अंतिम दिन भी भारी बारिश से राहत नहीं देगा। पूरे राज्य के लिए येलो अलर्ट जारी है। 31 अगस्त, 1 और 2 सितंबर को भी झारखंड में तेज हवाओं, बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश का अंदेशा है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधान रहने की सख्त हिदायत दी है। किसानों को खेतों में न जाने की सलाह दी गई है, वहीं आमजन से अपील की गई है कि पेड़ों या कच्चे मकानों के पास शरण न लें।

बारिश ने बिगाड़ा संतुलन

झारखंड में अब तक सामान्य से 29 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। हालांकि कुछ सप्ताह पहले तक यह आंकड़ा सामान्य से 85 प्रतिशत ज्यादा था, लेकिन समय के साथ बारिश की गति थोड़ी धीमी पड़ी है। इसके बावजूद गांव से लेकर शहर तक हर तरफ हालात खराब हैं। शहरों में जलजमाव ने यातायात और जनजीवन ठप कर दिया है तो गांवों में मकानों के गिरने और फसलों के नष्ट होने से लोग बेहाल हैं। नवरात्र की तैयारियों पर भी बारिश की मार पड़ी है। पंडाल निर्माण की रफ्तार धीमी हो गई है और आयोजक मौसम की बेरुखी से परेशान हैं। झारखंडवासी अब बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि आसमान से बरस रही यह आफत थमे और एक बार फिर सूखे धूप भरे दिनों की वापसी हो।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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