IIIT रांची में आदित्य की मौत पर बवाल! छात्र आंदोलन में कूदे देवेंद्र नाथ महतो, निदेशक के इस्तीफे की मांग से गरमाया माहौल
न्याय नहीं मिला तो पूरे झारखंड में होगा आंदोलन, संस्थान प्रबंधन पर उठाए सवाल, चेयरपर्सन की प्रस्तावित वार्ता में अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
रांची।
झारखंड की राजधानी रांची स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र की मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर संस्थान परिसर, खेलगांव में चल रहा आंदोलन मंगलवार को उस समय और तेज हो गया, जब JLKM के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में पहुंच गए। उनके पहुंचते ही आंदोलन को नई ताकत मिली। इस दौरान संस्थान के निदेशक राहुल श्रीवास्तव के इस्तीफे, मामले की निष्पक्ष जांच और प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई।

आदित्य की मौत पर आर-पार के मूड में छात्र नेता, निदेशक के इस्तीफे की मांग
देवेंद्र नाथ महतो ने आदित्य कुमार की मौत को लेकर संस्थान की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले शैक्षणिक दबाव पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में एक छात्र की जान चली गई।
उन्होंने संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। हालांकि, संस्थान की कथित लापरवाही और शैक्षणिक दबाव को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
लिफ्ट से लेकर एंबुलेंस और ऑक्सीजन तक पर सवाल

आदित्य की मौत के मामले में घटना के बाद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। देवेंद्र नाथ महतो ने लिफ्ट, एंबुलेंस, चालक, मेडिकल टीम और ऑक्सीजन की उपलब्धता से जुड़े आरोपों की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। अगर व्यवस्था में कोई कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब सवाल यह है कि जांच में इन आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और संस्थान प्रबंधन इस पर क्या जवाब देता है।
चेयरपर्सन की अनुपस्थिति पर नाराजगी, प्रबंधन को घेरा

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संस्थान के चेयरपर्सन अनिल भट्ट की प्रस्तावित वार्ता में अनुपस्थिति पर देवेंद्र नाथ महतो ने असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि जब छात्र न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तब संस्थान के जिम्मेदार पदाधिकारियों को सामने आकर उनकी बात सुननी चाहिए।
उन्होंने निदेशक राहुल श्रीवास्तव के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेना और उनके सवालों का जवाब देना संस्थान प्रशासन की जिम्मेदारी है।
गरीब परिवारों के बच्चों पर दबाव का मुद्दा उठाया
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज लेकर अपने बच्चों को प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने भेजते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों पर आर्थिक और शैक्षणिक दबाव को समझना तथा उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना संस्थान की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों का भविष्य बनाना है, न कि उन्हें असहाय परिस्थितियों में छोड़ देना। इस मामले में हर पहलू की जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे झारखंड में आंदोलन!
देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलनरत छात्रों को भरोसा दिलाया कि न्याय की लड़ाई में वे उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई और निदेशक के इस्तीफे के सवाल पर निर्णय लेने में देरी हुई, तो आंदोलन को पूरे झारखंड में व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को देशभर के विद्यार्थियों के बीच उठाने की भी बात कही।
अब सबकी नजर जांच और संस्थान प्रबंधन के जवाब पर
आदित्य कुमार की मौत के बाद उठ रहे सवालों ने संस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा, शैक्षणिक दबाव और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। आंदोलन के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि संस्थान प्रबंधन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और मामले की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—आदित्य की मौत की निष्पक्ष जांच, आपातकालीन व्यवस्था से जुड़े आरोपों की पड़ताल, संस्थान प्रशासन की जवाबदेही और निदेशक का इस्तीफा। आंदोलन आगे क्या रूप लेगा, यह संस्थान प्रबंधन की प्रतिक्रिया और जांच की प्रगति पर निर्भर करेगा।
