झारखंड में अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा! पूजा के बहाने ससुराल से बुलाया, दो सगी बहनों की हत्या से मचा हड़कंप
डायन होने के शक में भाई पर दो बड़ी बहनों की हत्या का आरोप, वारदात के बाद खुद पहुंचा थाने; ओझा-गुणी के चक्कर में खूनी वारदात की आशंका
आदित्य ओहदार | क्राइम डेस्क
धालभूमगढ, झारखंड। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के बाबईदा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां डायन होने के शक में एक भाई पर अपनी दो सगी बड़ी बहनों की कुल्हाड़ी से हत्या करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने पूजा के बहाने दोनों बहनों को उनके ससुराल से अपने घर बुलाया था। सोमवार की सुबह हुई इस वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और पुलिस को अपनी दोनों बहनों की हत्या करने की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतकों की पहचान 55 वर्षीय दुलारी सोरेन और 50 वर्षीय लक्ष्मी मार्डी के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी स्वरूप टुडू लंबे समय से बीमार चल रहा था और अपना इलाज ओझा-गुणी से करा रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि अंधविश्वास और डायन संबंधी संदेह इस वारदात की वजह हो सकते हैं।
पूजा के बहाने ससुराल से बुलाया
जानकारी के अनुसार, आरोपी स्वरूप टुडू ने रविवार को अपनी दोनों बड़ी बहनों को उनके ससुराल से अपने घर बुलाया था। दुलारी सोरेन की ससुराल चरईगोड़ा गांव में, जबकि लक्ष्मी मार्डी की ससुराल बासाझोर गांव में बताई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, घर में पूजा-पाठ किया गया था। आरोप है कि इसके बाद सोमवार तड़के स्वरूप ने दोनों बहनों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी।
वारदात के बाद आरोपी ने घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और खुद धालभूमगढ़ थाने पहुंच गया। हालांकि, शुरुआत में वह पुलिसकर्मियों को घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था। इसी बीच पंचायत के मुखिया को घटना की सूचना मिली। इसके बाद गांव के एक व्यक्ति को घर की छत के रास्ते अंदर भेजा गया, जहां दोनों बहनों के शव पड़े मिले। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
ओझा-गुणी के चक्कर में वारदात की आशंका
पुलिस की प्रारंभिक जांच में घर के भीतर पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री मिलने की बात सामने आई है। धालभूमगढ़ थाना प्रभारी नीरज मिश्रा के अनुसार, ग्रामीणों से पूछताछ और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर ओझा-गुणी से जुड़े अंधविश्वास की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस खौफनाक वारदात के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई।
बताया जा रहा है कि आरोपी स्वरूप घर पर रहकर खेती-बाड़ी का काम करता था। उसकी शादी करीब तीन वर्ष पहले ढांगाकमल गांव में हुई थी, लेकिन उसकी पत्नी अब उसके साथ नहीं रहती है। घर से आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाइयां भी मिली हैं। पुलिस आरोपी की मानसिक स्थिति, बीमारी और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
थाने पहुंचकर बोला आरोपी—’दिमाग काम नहीं किया’
पुलिस के अनुसार, थाने पहुंचने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था, इसलिए उसने अपनी बहनों की हत्या कर दी। हालांकि, इस बयान के पीछे की परिस्थितियों और घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना ने एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और डायन के नाम पर महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीमारी और परेशानियों का समाधान अंधविश्वास में तलाशने की प्रवृत्ति किस तरह भयावह परिणाम ला सकती है, यह घटना उसका गंभीर उदाहरण है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस वारदात से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दुलारी सोरेन के 13 वर्षीय बेटे के सिर से पहले ही पिता का साया उठ चुका था। वहीं, लक्ष्मी मार्डी के दो बेटे हैं, जिनकी पहचान लच्छू राम मार्डी और मुनीराम मार्डी के रूप में हुई है।
एक ही परिवार की दो महिलाओं की हत्या से बाबईदा गांव में मातम का माहौल है। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस दोहरे हत्याकांड ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अंधविश्वास के नाम पर निर्दोष लोगों की जान लेने का सिलसिला कब थमेगा।
