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साइबर ठगी के नेटवर्क में झारखंड के कई जिले सुर्खियों में! देवघर देश में तीसरे नंबर पर, गिरिडीह-धनबाद की रैंकिंग ने बढ़ाई चिंता

🔴 मुख्य हाइलाइट्स: झारखंड में साइबर अपराध को लेकर बढ़ी चिंता! उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देवघर देशभर में तीसरे, दुमका 14वें, फर्जी सिम कार्ड के मामले में गिरिडीह 10वें और एटीएम से ठगी की रकम निकालने के मामलों में धनबाद 13वें स्थान पर है। जामताड़ा के बाद अब राज्य के अन्य जिलों पर भी उठे सवाल, हालांकि रैंकिंग की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

हंसराज चौरसिया
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साइबर ठगी के नेटवर्क में झारखंड के कई जिले सुर्खियों में! देवघर देश में तीसरे नंबर पर, गिरिडीह-धनबाद की रैंकिंग ने बढ़ाई चिंता

रांची | झारखंड न्यूज़ 24

झारखंड में साइबर अपराध का दायरा लगातार चर्चा में है। कभी देशभर में साइबर ठगी के लिए चर्चित जामताड़ा के बाद अब राज्य के दूसरे जिलों के नाम भी अलग-अलग अपराध श्रेणियों में सामने आ रहे हैं। देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद से जुड़े आंकड़े साइबर अपराधियों के नेटवर्क, फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल और ठगी की रकम निकालने के तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, साइबर अपराध के मामलों में देवघर देशभर में तीसरे स्थान पर है, जबकि दुमका 14वें स्थान पर दर्ज किया गया है।

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की अगस्त 2026 में आयोजित प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान देश के शीर्ष 15 जिलों से संबंधित सूची सामने आई। इस सूची में साइबर अपराध के दर्ज मामलों से लेकर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल सिम कार्डों के अवैध आवंटन तक कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया। इसके अलावा, साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल और ठगी से हासिल रकम को एटीएम व चेक के जरिए निकालने जैसे मामलों को भी समीक्षा का आधार बनाया गया।

देवघर देश में तीसरे स्थान पर, दुमका भी पीछे नहीं

साइबर अपराध के मामलों में देवघर का देशभर में तीसरे स्थान पर पहुंचना झारखंड के लिए चिंता का विषय है। वहीं, दुमका का 14वें स्थान पर होना बताता है कि साइबर अपराध की चुनौती केवल जामताड़ा तक सीमित नहीं रह गई है। हालांकि, इन रैंकिंग के आधार और संबंधित मामलों की आधिकारिक पुष्टि के लिए मूल सरकारी रिपोर्ट का सत्यापन जरूरी है।

फर्जी सिम कार्ड जारी करने में गिरिडीह 10वें नंबर पर

साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए अपराधी अक्सर मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में गलत पहचान या अवैध तरीके से सिम कार्ड जारी होना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी सिम कार्ड जारी करने के मामले में गिरिडीह देशभर में 10वें स्थान पर है। यह स्थिति मोबाइल सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में सत्यापन और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत की ओर ध्यान खींचती है।

ठगी की रकम निकालने के नेटवर्क में धनबाद 13वें स्थान पर

साइबर ठगी के बाद अपराधियों के सामने ठगी गई रकम को निकालने और उसे दूसरे खातों तक पहुंचाने की चुनौती होती है। इसके लिए एटीएम, चेक और दूसरे बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ठगी की रकम को एटीएम के जरिए निकालने से जुड़े मामलों में धनबाद देशभर में 13वें स्थान पर दर्ज किया गया है।

जामताड़ा के बाद अब दूसरे जिलों पर भी निगरानी की जरूरत

झारखंड का जामताड़ा लंबे समय से साइबर ठगी के मामलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। लेकिन देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद से जुड़े ये आंकड़े संकेत देते हैं कि साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं पर राज्य के कई जिलों में निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। हालांकि, किसी जिले की रैंकिंग के आधार पर वहां के सभी निवासियों को अपराध से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

 

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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