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पलामू में गरीबों के अनाज पर सरकारी लापरवाही का बड़ा खुलासा! डेडलाइन खत्म, 3 दिन की मोहलत भी बेअसर, आखिर किसकी सुस्ती से अटकी राशन की सप्लाई?

पलामू में गरीबों के राशन पर लापरवाही का बड़ा खुलासा! 15 अक्टूबर की डेडलाइन और 3 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी बेअसर, खाद्यान्न आपूर्ति अधूरी रहने पर विभाग नाराज, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल!

हंसराज चौरसिया
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पलामू में गरीबों के अनाज पर सरकारी लापरवाही का बड़ा खुलासा! डेडलाइन खत्म, 3 दिन की मोहलत भी बेअसर, आखिर किसकी सुस्ती से अटकी राशन की सप्लाई?

 

मेदिनीनगर (पलामू)। गरीबों के हक का अनाज समय पर राशन दुकानों तक पहुंचाने की सरकारी व्यवस्था पर पलामू में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अक्टूबर 2026 के लिए आवंटित खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी में ऐसी लापरवाही सामने आई है कि विभाग को संबंधित अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जतानी पड़ी। पहले 15 अक्टूबर तक आपूर्ति पूरी करने का निर्देश दिया गया, फिर तीन दिनों की अतिरिक्त मोहलत देकर 18 अक्टूबर तक समय बढ़ाया गया। इसके बावजूद पलामू में खाद्यान्न आपूर्ति पूरी नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी आदेशों का पालन कराने में कहां चूक हो रही है? क्या अधिकारियों की निगरानी कमजोर पड़ गई है या आपूर्ति व्यवस्था में ही कोई बड़ी खामी है?

 

मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। विभाग ने साफ शब्दों में नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते और लगातार अनुश्रवण करते, तो डोर स्टेप डिलीवरी की अवधि बढ़ाने की नौबत ही नहीं आती। विभाग ने इस स्थिति को अत्यंत खेदजनक बताते हुए इसे कार्य में लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता का संकेत माना है। विभाग की इस टिप्पणी ने जिले की खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर कर दिए हैं।

 

 

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दरअसल, अक्टूबर महीने के खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी पूरी कराने के लिए विभाग ने 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को ही निर्देश जारी कर दिए थे। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 15 अक्टूबर तक हर हाल में आपूर्ति पूरी कराई जाए। यदि किसी कारण से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा नहीं हो पाता है, तो देरी का कारण बताते हुए रिपोर्ट देनी होगी। इसके बावजूद जब स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, तो विभाग को समयसीमा बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा।

 

खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के उप सचिव राम कृष्ण कुमार ने 15 अक्टूबर को पत्र जारी कर पलामू समेत छह जिलों को विशेष परिस्थिति में डोर स्टेप डिलीवरी पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर तक की मोहलत दी थी। पलामू के अलावा चतरा, देवघर, गिरिडीह, गोड्डा और पूर्वी सिंहभूम जिले भी इस निर्देश के दायरे में थे। लेकिन पलामू में आपूर्ति पूरी नहीं होने की स्थिति ने एक बार फिर सरकारी निर्देशों के अनुपालन और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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सबसे बड़ा सवाल गरीबों के राशन को लेकर है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में आपूर्ति की प्रक्रिया में देरी होने पर इसका असर आगे की वितरण व्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि आपूर्ति में देरी के कारण किन-किन राशन दुकानों या लाभुकों पर वास्तविक असर पड़ा है। यही वजह है कि अब देरी के कारणों की स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

 

विभाग की नाराजगी के बाद अब निगाहें पलामू के संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल यह भी है कि जब पहले से समयसीमा तय थी और फिर अतिरिक्त समय भी दिया गया, तो काम समय पर पूरा कराने के लिए प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो सकी? क्या इस मामले में जिम्मेदारी तय होगी या विभागीय फटकार के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

 

सरकारी आदेश, तय समयसीमा और अतिरिक्त मोहलत के बावजूद खाद्यान्न आपूर्ति अधूरी रहने का मामला अब जवाबदेही की मांग कर रहा है। गरीबों के हक से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट होना जरूरी है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और पलामू में खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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