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देशभर में कल से मनाई जाएगी नवरात्रि, मां दुर्गा की आराधना में डूबेगा जनमानस

हंसराज चौरसिया
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देशभर में कल से मनाई जाएगी नवरात्रि, मां दुर्गा की आराधना में डूबेगा जनमानस

पूजा-पंडालों की सजावट अंतिम चरण में, डीजे और रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाएंगे शहर-बाजार; डांडिया की धूम के बीच ज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद् डॉ. साकेत कुमार पाठक ने नवरात्रि के धार्मिक महत्व पर डाला प्रकाश

विशेष संवाददाता।

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देशभर में कल से मनाई जाएगी नवरात्रि, मां दुर्गा की आराधना में डूबेगा जनमानसपूजा-पंडालों की सजावट अंतिम चरण में, डीजे और रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाएंगे शहर-बाजार; डांडिया की धूम के बीच ज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद् डॉ. साकेत कुमार पाठक ने नवरात्रि के धार्मिक महत्व पर डाला प्रकाशमंदिरों और पूजा-पंडालों में तैयारियां तेजडीजे और रंग-बिरंगी लाइटों से बढ़ेगी उत्सव की रौनकडांडिया और गरबा कार्यक्रमों को लेकर युवाओं में उत्साहज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद् डॉ. साकेत कुमार पाठक ने बताया नवरात्रि का महत्वनवरात्रि में व्रत और पूजा के साथ संयम का महत्वकलश स्थापना से शुरू होंगे नौ दिनों के अनुष्ठानबाजारों में बढ़ेगी चहल-पहल, खरीदारी को लेकर उत्साहनारी शक्ति के सम्मान का संदेश देता है नवरात्रि पर्वस्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी देना होगा ध्यानशांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रशासन और पूजा समितियों की भूमिका अहमधार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का पर्वविजयादशमी के साथ होगा पर्व का समापन

देशभर में कल से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। मां दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और भक्ति के नौ दिनों के इस पावन पर्व को लेकर शहरों से लेकर गांवों तक तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों की साफ-सफाई, पूजा-पंडालों की सजावट, बाजारों में खरीदारी और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। चारों ओर भक्ति, आस्था और उल्लास का वातावरण बनने लगा है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु व्रत रखकर, कलश स्थापना कर तथा दुर्गा सप्तशती और देवी मंत्रों का पाठ कर सुख-समृद्धि, शांति और परिवार के कल्याण की कामना करेंगे।

नवरात्रि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव, नारी शक्ति के सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां दुर्गा की आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति, ज्ञान और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है।

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मंदिरों और पूजा-पंडालों में तैयारियां तेज

 

नवरात्रि के आगमन को देखते हुए विभिन्न स्थानों पर मंदिरों और पूजा-पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाने की तैयारी की जा रही है। कहीं भव्य प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं, तो कहीं रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक झालरों और विद्युत सजावट से पूजा स्थलों को नया रूप दिया जा रहा है। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था करने की तैयारियां भी चल रही हैं।

पूजा समितियों की ओर से पंडालों को आकर्षक और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने के साथ-साथ पूजा स्थल पर प्रकाश, पेयजल, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम होने वाली आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी नवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह रहता है। गांवों के मंदिरों में सामूहिक पूजा, भजन-कीर्तन और देवी जागरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में पूजा-पंडालों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों की भी तैयारी की जाती है।

डीजे और रंग-बिरंगी लाइटों से बढ़ेगी उत्सव की रौनक

नवरात्रि के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहते हैं। पूजा-पंडालों और आसपास के क्षेत्रों में रंग-बिरंगी लाइटें, आकर्षक विद्युत सजावट और पारंपरिक सजावटी सामग्री उत्सव की रौनक बढ़ाती हैं। शाम होते ही रोशनी से जगमगाते पूजा स्थल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

 

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कई स्थानों पर भक्ति संगीत, भजन और देवी गीतों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं, कुछ पूजा समितियां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामूहिक उत्सव की भी तैयारी करती हैं। डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल के दौरान प्रशासनिक दिशा-निर्देशों, निर्धारित समय-सीमा और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन करना आवश्यक होगा, ताकि धार्मिक उत्सव का आनंद सभी लोग शांतिपूर्ण ढंग से ले सकें।

नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक गीतों और भजनों के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया जाता है। श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। कई स्थानों पर माता के जागरण और भजन संध्या के आयोजन भी किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय कलाकारों के साथ श्रद्धालु अपनी सहभागिता निभाते हैं।

डांडिया और गरबा कार्यक्रमों को लेकर युवाओं में उत्साह

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नवरात्रि के दौरान डांडिया और गरबा कार्यक्रमों का विशेष आकर्षण रहता है। खासकर युवाओं और महिलाओं में इन आयोजनों को लेकर उत्साह देखा जाता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग सामूहिक रूप से गरबा और डांडिया प्रस्तुतियों में भाग लेते हैं। रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक संगीत और सामूहिक नृत्य नवरात्रि के उत्सव को और भी जीवंत बना देते हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में नवरात्रि की अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया की विशेष पहचान है, जबकि पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा भव्य पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए प्रसिद्ध है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी मां दुर्गा की पूजा, कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पर्व मनाया जाता है।

अब कई शहरों और कस्बों में भी सामूहिक डांडिया कार्यक्रमों का आयोजन होने लगा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक साथ उत्सव में भाग लेते हैं। आयोजकों की ओर से प्रतिभागियों की सुविधा, सुरक्षा और कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता है।

ज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद् डॉ. साकेत कुमार पाठक ने बताया नवरात्रि का महत्व

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ज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद् डॉ. साकेत कुमार पाठक ने बताया कि नवरात्रि शक्ति की उपासना का महापर्व है। भारतीय धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा को शक्ति, साहस, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है। प्रत्येक स्वरूप अपने विशेष गुणों और आध्यात्मिक संदेश के लिए जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ करना ही नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक विचारों को अपनाना भी है। यह पर्व मनुष्य को संयम, अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देता है। व्रत, ध्यान, मंत्र-जप और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को एकाग्र करने और जीवन में अच्छे विचारों को स्थान देने का प्रयास करता है।

डॉ. पाठक के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की परंपरा है।

उन्होंने बताया कि देवी के इन स्वरूपों की पूजा के पीछे गहरा आध्यात्मिक संदेश निहित है। मां शैलपुत्री दृढ़ता और स्थिरता की प्रेरणा देती हैं, जबकि मां ब्रह्मचारिणी तप, साधना और संयम का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा साहस और निर्भयता का संदेश देती हैं। मां कूष्मांडा को सृजनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। मां स्कंदमाता मातृत्व और करुणा, मां कात्यायनी शक्ति और संकल्प, मां कालरात्रि भय पर विजय, मां महागौरी पवित्रता तथा मां सिद्धिदात्री सिद्धि और पूर्णता की प्रतीक मानी जाती हैं।

नवरात्रि में व्रत और पूजा के साथ संयम का महत्व

नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग नौ दिनों तक उपवास करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु प्रथम और अंतिम दिन व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। पूजा-पद्धति और व्रत के नियम परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

डॉ. साकेत कुमार पाठक ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धा के साथ-साथ संयम और अनुशासन का भी विशेष महत्व है। नवरात्रि के दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार, विचार और दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। दूसरों के प्रति सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और समाज में सद्भाव बनाए रखना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि व्रत का पालन व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार करना चाहिए। स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही उपवास करना उचित है। धार्मिक आस्था के साथ शरीर की आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।

कलश स्थापना से शुरू होंगे नौ दिनों के अनुष्ठान

नवरात्रि के पहले दिन कई घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ पूजा-अर्चना की शुरुआत होती है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है। श्रद्धालु पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं और परंपरा के अनुसार कलश स्थापना करते हैं। इसके बाद नौ दिनों तक नियमित पूजा, दीप प्रज्वलन, मंत्र-जप और आरती की जाती है।

कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, शुभ मुहूर्त की गणना संबंधित वर्ष की तिथि, स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार की जाती है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि करनी चाहिए।

नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी मंत्रों का जप और भजन-कीर्तन करने की भी परंपरा है। अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह और शाम मां की आरती करते हैं। घरों में पूजा के साथ-साथ मंदिरों में सामूहिक आरती और धार्मिक प्रवचन के आयोजन भी किए जाते हैं।

बाजारों में बढ़ेगी चहल-पहल, खरीदारी को लेकर उत्साह

नवरात्रि को देखते हुए बाजारों में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है। पूजा सामग्री, चुनरी, नारियल, कलश, मिट्टी के दीपक, अगरबत्ती, फूल-माला और देवी की तस्वीरों की मांग बढ़ जाती है। इसके साथ ही पारंपरिक कपड़ों, आभूषणों, सजावटी वस्तुओं और रोशनी के सामान की खरीदारी भी की जाती है।

पूजा समितियों को पंडाल सजाने के लिए कपड़े, बांस, विद्युत झालर, सजावटी सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की जरूरत होती है। ऐसे में स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी पर्व के दौरान व्यापार बढ़ने की उम्मीद रहती है।

नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का अवसर ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामुदायिक गतिविधियों को गति देने वाला पर्व भी है। फूल विक्रेताओं, मूर्तिकारों, सजावट करने वाले कारीगरों, टेंट व्यवसायियों, बिजली मिस्त्रियों और अन्य छोटे कारोबारियों को इस दौरान काम मिलता है।

हालांकि, त्योहार के दौरान खरीदारी करते समय लोगों को अनावश्यक खर्च से बचने और स्थानीय व्यापारियों से सामान खरीदकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देता है नवरात्रि पर्व

नवरात्रि का एक महत्वपूर्ण संदेश नारी शक्ति का सम्मान भी है। मां दुर्गा को शक्ति और साहस का स्वरूप मानकर उनकी आराधना की जाती है। देवी के विभिन्न स्वरूप समाज को यह प्रेरणा देते हैं कि शक्ति, करुणा, ज्ञान और साहस जीवन के महत्वपूर्ण गुण हैं।

डॉ. साकेत कुमार पाठक के अनुसार, नवरात्रि की आध्यात्मिक भावना को जीवन में उतारना आवश्यक है। देवी की पूजा के साथ महिलाओं का सम्मान, बेटियों की शिक्षा, सामाजिक समानता और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना इस पर्व के संदेश को सार्थक बनाता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व तभी अधिक सार्थक होते हैं, जब उनसे मिलने वाली प्रेरणा हमारे दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार में दिखाई दे। यदि नवरात्रि के अवसर पर लोग आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना अपनाते हैं, तो इससे समाज में सद्भाव मजबूत होगा।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी देना होगा ध्यान

नवरात्रि के दौरान पूजा-पंडालों और मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। पूजा स्थलों के आसपास कूड़ा जमा न होने देना, प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचना और पूजा सामग्री का उचित निस्तारण करना सभी की जिम्मेदारी है।

पूजा समितियां आयोजन स्थल पर कूड़ेदान की व्यवस्था कर सकती हैं और श्रद्धालुओं को स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक कर सकती हैं। फूल-माला और अन्य जैविक पूजा सामग्री को जलस्रोतों में फेंकने के बजाय निर्धारित स्थानों पर जमा करना पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है।

इसी तरह, विद्युत सजावट में सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल, खुले तारों से बचाव और अग्निशमन संबंधी सावधानियां भी जरूरी हैं। बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, निकास मार्ग और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है।

शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रशासन और पूजा समितियों की भूमिका अहम

नवरात्रि के दौरान धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में प्रशासन, पुलिस और पूजा समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बड़े पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु रखना, यातायात व्यवस्था बनाए रखना और भीड़ के दबाव से बचने के उपाय करना आवश्यक है।

डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में ध्वनि का स्तर नियंत्रित रखना विशेष रूप से जरूरी है, ताकि बुजुर्गों, बच्चों, बीमार लोगों और आसपास रहने वाले नागरिकों को परेशानी न हो। पूजा समितियों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

इसके अतिरिक्त, पंडालों में बिजली की सुरक्षित वायरिंग, अग्निशमन उपकरण, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन निकास की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए। श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे पूजा स्थलों पर अनुशासन बनाए रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में प्रशासन को सूचना दें।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का पर्व

नवरात्रि का उत्सव समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ आने का अवसर देता है। पूजा-पंडालों में लोग सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। कई स्थानों पर धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सेवा, भंडारा और जरूरतमंदों के बीच सहायता सामग्री वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

ऐसे आयोजनों से आपसी सहयोग और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलता है। बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी देने का अवसर भी मिलता है। परिवारों में पूजा-पाठ और धार्मिक कथाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाता है।

डॉ. साकेत कुमार पाठक ने नवरात्रि को आत्मचिंतन और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर बताते हुए कहा कि पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे विचारों और आचरण को स्थान दे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मानवता, करुणा और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करना भी आवश्यक है।

विजयादशमी के साथ होगा पर्व का समापन

नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दशमी तिथि पर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर इस अवसर पर रावण दहन, धार्मिक शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिमा विसर्जन भी किया जाता है।

विजयादशमी का संदेश है कि जीवन में सत्य, साहस और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना से प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणा को जीवन में बनाए रखना ही पर्व का व्यापक उद्देश्य है।

देशभर में नवरात्रि को लेकर बन रहा उत्साह इस बात का संकेत है कि भारतीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष स्थान है। मंदिरों की घंटियों, मां दुर्गा के जयकारों, भजन-कीर्तन, डांडिया और गरबा की प्रस्तुतियों तथा रोशनी से सजे पूजा-पंडालों के बीच नौ दिनों तक वातावरण भक्तिमय रहने की उम्मीद है।

नवरात्रि के आगमन के साथ ही श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के लिए तैयार हैं। अब सभी को पर्व के शुभारंभ का इंतजार है। आस्था, अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व लोगों को नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश देगा।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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