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मंडप में बैठी दुल्हन ने ऐसा कहा कि सबके चेहरे के रंग उड़ गए, वो मेरे पापा हैं, जब जरूरत होगी, मैं जाऊंगी, किसी से इजाज़त नहीं लूंगी!

हंसराज चौरसिया
3 Min Read
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डेस्क-
मनोरंजन/वायरल

 

शादी के मंडप में ऐसा नज़ारा कम ही देखने को मिलता है। जहां आमतौर पर दुल्हनें चुपचाप पंडितजी की बातें सुनती हैं, वहीं इस दुल्हन ने एक ऐसा जवाब दिया कि पूरा माहौल कुछ पल के लिए थम गया।

 

 

 

 

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में लाल जोड़े में सजी दुल्हन पूरी शालीनता के साथ बैठी थी। पंडितजी विवाह के वचन पढ़ रहे थे। तभी उन्होंने कहा अब यह घर तुम्हारा नहीं रहा, अब तुम्हें मायके जाने से पहले अनुमति लेनी होगी। बस इतना सुनना था कि दुल्हन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। पापा हैं वो, जब जरूरत होगी, मैं जाऊंगी… इसके लिए किसी से इजाज़त नहीं लूंगी।

 

 

 

 

यह सुनकर पूरा मंडप सन्न रह गया। कुछ सेकंड तक सन्नाटा छाया रहा, फिर धीरे-धीरे तालियों की आवाज़ गूंजने लगी। कोई मुस्कुरा दिया, कोई चौंक उठा पर हर चेहरा इस आत्मविश्वास से भरे जवाब से प्रभावित दिखा।

 

 

 

 

दुल्हन के इस जवाब ने उस पुराने सामाजिक रिवाज़ को झटका दिया जिसमें बेटियों से कहा जाता था कि अब मायका तुम्हारा नहीं रहा। लेकिन इस दुल्हन ने पूरे आत्मसम्मान से समाज को एक नया संदेश दे दिया – पिता का घर कभी पराया नहीं होता।

 

 

 

 

 

वीडियो में आगे दिखता है कि ससुराल पक्ष के कुछ लोग भी मुस्कुरा देते हैं, और माहौल में एक अनोखी सहजता फैल जाती है। दुल्हन मजाकिया लहजे में कहती है चित मेरी, पट भी मेरी। सब हँस पड़ते हैं, लेकिन इस हल्के पल में भी उसने बहुत गहरी बात कह दी बेटी चाहे शादीशुदा हो जाए, पर अपने पिता से उसका रिश्ता किसी अनुमति का मोहताज नहीं होता।

 

 

 

 

 

यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लोग कह रहे हैं कि यह नई पीढ़ी की दुल्हन है जो ससुराल की मर्यादा भी जानती है और अपने मायके का अधिकार भी।

 

 

 

 

कई यूज़र्स ने इसे बेटियों के आत्मसम्मान की आवाज़” बताया, तो कुछ ने लिखा, इस दुल्हन ने वही कहा जो हर बेटी के दिल में होता है, बस कह नहीं पाती।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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