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LPG गैस पर केंद्र का बड़ा एक्शन या उपभोक्ताओं की बढ़ेगी आफत? आधार बायोमीट्रिक पर हाई कोर्ट का वार, दिव्यांगों की परेशानी से मचा हड़कंप!

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LPG गैस पर केंद्र का बड़ा एक्शन या उपभोक्ताओं की बढ़ेगी आफत? आधार बायोमीट्रिक पर हाई कोर्ट का वार, दिव्यांगों की परेशानी से मचा हड़कंप!

 

 1 अक्टूबर से लागू नियम पर अदालत सख्त! केंद्र और तेल कंपनियों को 2 हफ्ते का अल्टीमेटम, अब सरकार को देना होगा जवाब!

 

नई दिल्ली।

 

घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है! आधार बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण (BAA) की अनिवार्यता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। खासकर दृष्टिबाधित दिव्यांग उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी का मुद्दा उठने के बाद अदालत ने केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अब सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।

 

गैस उपभोक्ताओं से जुड़ा नियम अदालत के दरवाजे तक पहुंचा!

 

एक अक्टूबर से लागू अनिवार्य बायोमीट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन को चुनौती देते हुए 75 प्रतिशत दिव्यांग अधिवक्ता पुलकित लूथरा ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में आईरिस स्कैन भी शामिल है, जिससे दृष्टिबाधित लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

इस मुद्दे ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था को लागू करते समय दिव्यांग उपभोक्ताओं की मुश्किलों का पर्याप्त ध्यान रखा गया है?

 

 

हाई कोर्ट का नोटिस, केंद्र से मांगा जवाब!

 

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने की। अदालत ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड और सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।

 

अब सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले में आगे क्या रुख सामने आता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

 

सरकार ने बताई अपनी मजबूरी, दिव्यांगों को राहत का भरोसा!

 

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण का फैसला सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस प्रावधान में दिव्यांगों की जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।

 

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या बदलेगा नियम?

 

क्या दिव्यांग उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण में विशेष राहत मिलेगी?

 

क्या सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करेगी?

 

क्या अदालत के सामने सरकार कोई नया समाधान पेश करेगी?

 

 

फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। हाई कोर्ट ने अभी केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नियम में बदलाव, छूट या किसी अन्य राहत को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं आया है।

 

अब देखना होगा कि केंद्र सरकार दो सप्ताह के भीतर अदालत में क्या जवाब देती है और दिव्यांग उपभोक्ताओं की परेशानी दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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