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बकरी बाजार में बन रहा अंकोरवाट मंदिर तर्ज पर दुर्गा पूजा पंडाल

हंसराज चौरसिया
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रांची-
उत्कर्ष तिवारी

रांची के बकरी बाजार में इस साल की दुर्गा पूजा के लिए तैयार हो रहा पूजा पंडाल, श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने वाला है। इस बार का पंडाल दुनिया के सबसे बड़े मंदिर कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।भारतीय युवक संघ बकरी बाजार के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि पंडाल का निर्माण महालया के दिन तक पूरा हो जाएगा, जबकि विधिवत उद्घाटन 26 सितंबर, यानी पूजा के चौथे दिन किया जाएगा। पंडाल लगभग 14,400 वर्ग फीट में तैयार किया जा रहा है, जो बकरी बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा पूजा पंडाल होगा। राहुल अग्रवाल ने बताया कि पंडाल निर्माण में केवल प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, जिनमें पाठ काठी, मलाई काठी, होगला पत्ता, पाम पत्ता, बूलेन रस्सी, त्रिपुरा मैट और त्रिपुरा मदूर काठी शामिल हैं।

पूजा पंडाल की मां दुर्गा की प्रतिमा पश्चिम बंगाल के अनूप दा द्वारा बनाई जा रही है। पूजा समिति के सदस्य संजय कुमार के मुताबिक, प्रतिमा की चौड़ाई 36 फीट और ऊंचाई लगभग 26 फीट होगी। तीन महीनों से चल रही मेहनत के बाद यह पंडाल श्रद्धालुओं को अद्भुत अनुभव देने के लिए तैयार है।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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