नशामुक्त झारखंड के लिए रोकथाम और व्यवहार परिवर्तन को जनआंदोलन बनाना होगा : उमाशंकर सिंह
प्रोजेक्ट भवन में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित, युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, पंचायत और विभिन्न विभागों की भागीदारी पर जोर
रांची
झारखंड को नशामुक्त बनाने और नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन स्थित एमडीआई भवन में राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में नशे की रोकथाम, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग सह महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि नशे की चुनौती केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह युवाओं, परिवारों और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी नशामुक्ति अभियान की सफलता केवल आयोजित कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने लोगों को नशे की गिरफ्त में आने से बचाया गया और कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
इसके लिए नशे की रोकथाम को पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, समुदायों और विभिन्न सरकारी विभागों की साझा जिम्मेदारी बनाना होगा। सचिव ने कहा कि नशामुक्ति अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक नेतृत्व पर आधारित जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा। जमीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करके ही नशे की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सकता है। कार्यशाला में सामाजिक कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने नशे की रोकथाम में परिवार और समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समय पर सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर अनेक युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाया जा सकता है। नशे के खिलाफ लड़ाई में परिवार, समाज और समुदाय सबसे बड़ी ताकत हैं।
इसे केवल सरकार की जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवा संगठनों को नशा रोकथाम अभियान से जोड़ने पर जोर दिया। इन समूहों की सक्रिय भागीदारी से नशे के शुरुआती संकेतों की पहचान, जरूरतमंद लोगों को परामर्श उपलब्ध कराने और समुदाय के स्तर पर जागरूकता फैलाने में मदद मिल सकती है। किरण कुमारी पासी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित करना और नशे से प्रभावित व्यक्तियों को समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। सामुदायिक संगठनों को सशक्त बनाकर नशे की रोकथाम के प्रयासों को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जा सकता है। कार्यशाला में विभिन्न सरकारी विभागों, विकास सहयोगी संस्थाओं और विशेषज्ञों ने साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुखी तथा समुदाय केंद्रित नशा रोकथाम मॉडल पर विचार-विमर्श किया। प्रतिभागियों ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोकथाम, परामर्श, उपचार, पुनर्वास और समाज में पुनः समावेश की व्यवस्था को एकीकृत रूप से लागू करना आवश्यक है।
बैठक में जिला, प्रखंड और ग्राम स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि नशे से प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। विशेषज्ञों ने नशे की मांग में कमी लाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीतियां तैयार करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और अभियान के परिणामों का आकलन करने की जरूरत बताई। साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर बल दिया गया। राज्यस्तरीय कार्यशाला में पंचायती राज, नगर विकास, गृह विभाग के स्वापक पदार्थ नियंत्रण प्रकोष्ठ, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, एकीकृत बाल संरक्षण सेवाओं तथा झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।
