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महिलाओं का इंतजार हुआ खत्म, नवरात्रि से मंईयां सम्मान योजना की राशि 2500 रूपए सीधे बैंक खाते में

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रांची-

झारखंड की महिलाओं के लिए नवरात्रि के मौके पर खुशियों भरी खबर आई है। राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजना मंईयां सम्मान की लाभुक महिलाओं को अब लंबे समय से प्रतीक्षित सितंबर माह की ₹2500 की किस्त सीधे उनके बैंक खातों में मिलने वाली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महालया के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस राहत भरी खबर की घोषणा की। अधिकारियों के अनुसार, 22 सितंबर से नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही लाभुक महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर करना शुरू कर दिया जाएगा।

 

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अक्टूबर माह की राशि भी दीपावली से पहले उनके खातों में पहुंच जाए ताकि महिलाएं त्योहार की तैयारियों में किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करें। सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने बताया कि योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों को 9600 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं और सभी जिलों को नवंबर तक की राशि पहले ही आवंटित कर दी गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी बल्कि उनके सामाजिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा देगी। अब झारखंड की महिलाएं नवरात्रि की खुशियों के साथ आर्थिक सुरक्षा और स्वतंत्रता का अनुभव करेंगी। सरकार की यह पहल महिलाओं के जीवन में त्योहारी खुशियों और आर्थिक सशक्तिकरण का एक अनोखा संगम साबित होगी।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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