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रामकनाली खदान हादसा कृत्रिम आपदा, मरांडी ने कोयला माफियाओं और प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

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धनबाद-

धनबाद के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने रामकनाली खदान हादसे को प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार करते हुए इसे “कृत्रिम आपदा” करार दिया। मरांडी ने आरोप लगाया कि कोयला माफियाओं और जिला प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन और हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं। मरांडी ने कहा कि धनबाद में रोजाना 500 से 1000 ट्रक अवैध कोयला ढलेड़े से बाहर भेजा जाता है और हाइवा ट्रकों से अवैध वसूली की जाती है। कोयला माफिया 20 से 50 लाख रुपये तक की कमाई विभिन्न स्तरों पर बांटते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है, तो भाजपा आंदोलन करने को बाध्य होगी। मरांडी ने यह भी कहा कि जिस क्षेत्र में सात लोगों की मौत हुई, वहां 50 से अधिक परिवार खतरे में रह रहे हैं, और तत्काल प्रभाव से उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना आवश्यक है।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार हैं जो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की और पिछले वर्षों में झारखंड के सामाजिक राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन एवं रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में हंसराज झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 और क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र रूप से लेखन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दों सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक विमर्श और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। आदिवासी समुदायों से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है और समुदाय के बीच जाकर उनके सामाजिक सरोकारों चुनौतियों और स्थानीय परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। प्रत्यक्ष अनुभव और स्थानीय संदर्भों को अपनी रिपोर्टिंग में शामिल करना उनकी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हंसराज को राजनीतिक संवाद और मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी कार्य करने का अनुभव है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाना और उन्हें व्यापक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।शैक्षणिक रूप से हंसराज रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का मेल उनके लेखन को विषय की समझ और भाषा दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।हजारीबाग जिले के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं। वह पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के माध्यम से झारखंड के जमीनी मुद्दों सामाजिक बदलाव और जनसरोकार से जुड़े विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं।
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