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CID के निर्माता बी.पी. सिंह का निधन, टीवी जगत ने खोया क्राइम शो का बड़ा चेहरा

CID और आहट को नई पहचान देने वाले दिग्गज निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, भारतीय टेलीविजन में उनके योगदान को हमेशा किया जाएगा याद।

हंसराज चौरसिया
5 Min Read
CID के निर्माता बी.पी. सिंह का निधन
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CID के निर्माता बी.पी. सिंह का निधन, टीवी जगत ने खोया क्राइम शो का बड़ा चेहरा

 

77 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, आहट और CID जैसे धारावाहिकों से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर किया राज

 

हैदराबाद। भारतीय टेलीविजन पर अपराध और रहस्य की कहानियों को नई पहचान देने वाले मशहूर निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को 77 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनके निधन की खबर से मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार, 28 अक्टूबर को किया जाएगा।

 

बी.पी. सिंह भारतीय टेलीविजन के उन रचनाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपने काम से दर्शकों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। आहट और CID जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों के जरिए उन्होंने अपराध, रहस्य और रोमांच को छोटे पर्दे पर एक नई पहचान दी। उनके बनाए कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बने, बल्कि भारतीय टेलीविजन की लोकप्रिय संस्कृति का अहम हिस्सा भी बन गए।

 

CID ने घर-घर में दिलाई पहचान

 

वर्ष 1998 में शुरू हुआ धारावाहिक CID बी.पी. सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। अपराध की गुत्थियां सुलझाने वाली जांच टीम पर आधारित इस शो ने लंबे समय तक दर्शकों को बांधे रखा। इसकी कहानियां, जांच का अंदाज और यादगार किरदार लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। समय के साथ यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित क्राइम शोज में शामिल हो गया।

 

बी.पी. सिंह केवल इस शो के निर्माता और निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने इसमें डीसीपी शमशेर सिंह चित्रोले की भूमिका भी निभाई थी। पर्दे के पीछे अपनी रचनात्मक सोच से शो को दिशा देने वाले सिंह ने पर्दे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

 

आहट से पैदा किया रहस्य और रोमांच

 

क्राइम शो CID से पहले बी.पी. सिंह ने हॉरर धारावाहिक आहट के जरिए दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। वर्ष 1995 में प्रसारित हुए इस शो ने डर और रहस्य की कहानियों को छोटे पर्दे पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी अलग प्रस्तुति और रोमांचक कथानक के कारण आहट लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बना रहा।

 

उनके काम की खासियत यह थी कि वे दर्शकों की रुचि को समझते थे और कहानियों को इस तरह प्रस्तुत करते थे कि हर कड़ी के साथ उत्सुकता बनी रहे। यही वजह रही कि उनके धारावाहिकों ने मनोरंजन जगत में एक अलग मुकाम हासिल किया।

 

कैमरामैन से बने टेलीविजन के दिग्गज

 

27 अप्रैल 1949 को देहरादून में जन्मे बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्र पाल सिंह था। उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1973 में उन्होंने एक टेलीविजन समाचार संस्थान में कैमरामैन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। कैमरे के पीछे से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर निर्देशन और कार्यक्रम निर्माण तक पहुंचा।

 

अपने शुरुआती दौर में उन्होंने सिर्फ चार दिन नामक फिल्म पर काम किया और बाद में एक शून्य शून्य जैसे धारावाहिक के जरिए अपराध आधारित कहानियों की दुनिया में अपनी दिलचस्पी को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत और रचनात्मक क्षमता के बल पर टेलीविजन उद्योग में मजबूत पहचान बना ली।

 

अशोक पंडित ने जताया दुख

 

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने बी.पी. सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें बेहतरीन फिल्ममेकर और अच्छा दोस्त बताते हुए कहा कि उनके काम से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी। अशोक पंडित ने इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन में बी.पी. सिंह के अध्यक्ष रहने के दौरान उनके साथ अपने करीबी संबंधों को भी याद किया। उन्होंने दिवंगत निर्माता-निर्देशक के परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

 

बी.पी. सिंह का जाना भारतीय टेलीविजन के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने काम के जरिए ऐसी पहचान बनाई, जो किसी एक धारावाहिक या दौर तक सीमित नहीं रही। CID की जांच टीम और आहट की रहस्यमयी कहानियों के साथ उनकी यादें दर्शकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेंगी।

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राज्य प्रभारी
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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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