झारखंड में बड़ा फैसला! गैंगस्टर अनिल शर्मा, फहीम खान समेत 53 उम्रकैद के कैदियों की रिहाई पर ब्रेक
सरकार ने ठुकराया रिहाई का प्रस्ताव, जेल से बाहर आने पर बढ़ सकता था अपराध! डीसी-एसपी की रिपोर्ट के बाद राज्य सजा पुनरीक्षण समिति का बड़ा फैसला
क्राइम डेस्क। झारखंड।
आदित्य ओहदार
झारखंड में अपराध की दुनिया के चर्चित चेहरों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। राज्य सरकार ने गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और धनबाद के कुख्यात अपराधी फहीम खान समेत आजीवन कारावास की सजा काट रहे 53 कैदियों की रिहाई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ये सभी कैदी राज्य की अलग-अलग जेलों में बंद हैं और 20 साल या उससे अधिक समय से अपनी सजा काट रहे हैं। राज्य सजा पुनरीक्षण समिति की बैठक में इनकी रिहाई पर विचार करने के बाद प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। इस फैसले के बाद संबंधित कैदियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
20 साल से जेल में बंद, फिर भी नहीं मिलेगी रिहाई!
जानकारी के अनुसार, झारखंड की विभिन्न जेलों में लंबे समय से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 53 कैदियों की रिहाई के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे। इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य सजा पुनरीक्षण समिति को लेना था। कैदियों की लंबी सजा अवधि को देखते हुए उनकी रिहाई के प्रस्ताव पर विचार किया गया, लेकिन मामला केवल जेल में बिताए गए वर्षों तक सीमित नहीं रहा। कैदियों की रिहाई से कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।
डीसी-एसपी की रिपोर्ट ने बदला फैसला!
रिहाई के प्रस्तावों पर निर्णय लेने से पहले राज्य सरकार ने संबंधित जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) से रिपोर्ट मांगी थी। इन रिपोर्टों में आशंका जताई गई कि संबंधित कैदियों को जेल से बाहर आने की अनुमति देने पर उनके जिलों में अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।
जिलों से मिली रिपोर्टों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद समिति ने सभी 53 कैदियों की रिहाई के प्रस्तावों को खारिज कर दिया। इसके बाद गृह विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया।
अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और फहीम खान पर भी फैसला लागू
रिहाई का प्रस्ताव खारिज किए जाने वालों में गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली और धनबाद के फहीम खान जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। इनकी रिहाई को लेकर संबंधित स्तर पर प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन समिति के फैसले के बाद इन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
अब आगे क्या?
राज्य सरकार के इस फैसले से स्पष्ट है कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई पर विचार करते समय केवल उनकी सजा की अवधि को ही पर्याप्त आधार नहीं माना गया। संबंधित जिलों की पुलिस और प्रशासन से प्राप्त रिपोर्टों तथा कानून-व्यवस्था पर संभावित असर को भी ध्यान में रखा गया।
फिलहाल 53 कैदियों की रिहाई का रास्ता बंद हो गया है। राज्य सजा पुनरीक्षण समिति के फैसले के बाद गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। अब इन कैदियों को जेल में ही रहना होगा।
