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JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा: लाखों की डील, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क! CID के हाथ लगे अहम सुराग

मुख्य हाइलाइट्स: JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में CID को मिले अहम सुराग, कई राज्यों तक फैले कथित सिंडिकेट का खुलासा; अभ्यर्थियों से पांच लाख रुपये के लेन-देन की जांच, कोलकाता के होटल से नेपाल तक उत्तर रटवाने का आरोप; बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन से जुड़ रहीं कड़ियां, JSSC-CGL के दो आरोपियों की जमानत खारिज।

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JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले में बड़ा खुलासा: लाखों की डील, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क! CID के हाथ लगे अहम सुराग

 

कोलकाता के होटल से नेपाल तक अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने का आरोप, बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन से खुल रही कथित सिंडिकेट की परतें, JSSC-CGL के दो आरोपियों की जमानत खारिज

 

रांची-

 

झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। JPSC और JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को अब ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो एक संगठित गिरोह की भूमिका की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अभ्यर्थियों को तलाशने से लेकर उन्हें कथित तौर पर परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर पैसे लेने तक का पूरा नेटवर्क छोटे-छोटे समूहों में काम कर रहा था। आरोपियों के बैंक खातों में हुए लेन-देन और मोबाइल लोकेशन के मिलान से इस कथित सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

 

बोकारो से नेपाल तक फैला कथित नेटवर्क, परीक्षा से पहले रटवाये गये उत्तर

 

JSSC-CGL पेपर लीक मामले में CID ने अदालत को बताया है कि अभ्यर्थियों को झारखंड के बोकारो जिले के दुग्धा के अलावा पटना, कोलकाता, आसनसोल, दुर्गापुर और नेपाल में परीक्षा के उत्तर रटवाये गये थे। जांच में सामने आये इन तथ्यों ने परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। एजेंसी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों की तलाश करते थे और उन्हें कथित सिंडिकेट तक पहुंचाते थे। इसके बाद पैसों के लेन-देन के जरिए परीक्षा में सफलता दिलाने की व्यवस्था किये जाने का आरोप है।

 

पांच लाख रुपये के लेन-देन ने बढ़ायी जांच की आंच

 

मामले में गिरफ्तार आरोपी मुन्ना सिंह ने स्वीकार किया है कि उसने जनवरी 2026 में अभ्यर्थियों से अपने बैंक खाते में पांच लाख रुपये लिये थे। शुरुआत में उसने CID को बताया था कि यह रकम उसके पिता के इलाज के लिए ली गयी थी। हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार, मुन्ना सिंह ने परीक्षा से पहले कोलकाता के एक होटल में अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाये थे।

 

इस मामले में अमित सिंह, कुंदन कुमार और अमित लकड़ा के नाम भी सामने आये हैं। CID को आरोपियों के बैंक खातों की जांच में पैसों के लेन-देन से जुड़े तथ्य मिले हैं। अब जांच एजेंसी इन लेन-देन के पीछे की वास्तविक वजह और कथित नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

 

लगातार गिरफ्तारियां, कथित सिंडिकेट के दूसरे सदस्यों की तलाश

 

CID ने संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव को भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इनसे अभ्यर्थियों के साथ पैसों के लेन-देन के संबंध में जानकारी मिली है। जांच का दायरा अब कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, उनके संपर्कों और वित्तीय लेन-देन तक पहुंच गया है। हालांकि, पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और उनकी भूमिका कितनी व्यापक है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेगा।

 

दो आरोपियों की जमानत खारिज, धनबाद-बोकारो में उत्तर रटवाने का आरोप

 

JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने आरोपी मिथिलेश कुमार पांडेय और मनु कुमार सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। CID ने मिथिलेश कुमार पांडेय को तीन अक्तूबर और मनु कुमार सिंह को पांच अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। दोनों पर अपने संपर्कों के माध्यम से अभ्यर्थियों की कथित सेटिंग कराने और धनबाद व बोकारो में परीक्षा के प्रश्न तथा उत्तर रटवाने में मदद करने का आरोप है।

 

JPSC मामले में हाईकोर्ट में भी कानूनी लड़ाई जारी

 

उधर, झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं को रद्द करने की मांग से संबंधित रिट याचिकाओं को अपील याचिका के साथ संबद्ध करने का आग्रह खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह निर्णय लिया। सफल अभ्यर्थियों की ओर से इस आग्रह का विरोध करते हुए दलील दी गयी कि एकल पीठ में मामले की सुनवाई अंतिम दौर में है और याचिकाओं को अपील के साथ जोड़ने से कानूनी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

 

मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के न्याय का सवाल

 

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जिन परीक्षार्थियों ने वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा दी, उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि भर्ती प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष रही। CID को मिले तथ्यों के आधार पर अब कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों का पता लगाना जांच की अहम चुनौती है।

 

बैंक खातों के लेन-देन से लेकर मोबाइल लोकेशन तक, जांच के हर पहलू पर निगाहें टिकी हैं। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने पर कथित सिंडिकेट से जुड़े और कौन-से तथ्य सामने आते हैं।

 

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

 

इस समाचार में प्रस्तुत सभी आरोप एवं जांच से संबंधित जानकारियां उपलब्ध कराए गए विवरण के आधार पर प्रकाशित की गई हैं। मामले में उल्लिखित आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा उसका अपराध सिद्ध न हो जाए। इस समाचार का उद्देश्य केवल जनहित में सूचना प्रदान करना है, किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना नहीं। समाचार में वर्णित तथ्यों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एजेंसी एवं न्यायालय के निष्कर्षों के अधीन होगी।

 

— झारखंड NEWS 24

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हंसराज चौरसिया स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार एवं मीडिया कम्युनिकेशन से जुड़े पेशेवर हैं। वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत स्वतंत्र प्रभात से की। बीते वर्षों में उन्होंने झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन, रिपोर्टिंग और ग्राउंड कवरेज किया है।उन्होंने विभिन्न चुनावों की प्रत्यक्ष एवं जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए चुनावी माहौल, जनमत, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग का अनुभव हासिल किया है। क्षेत्रीय राजनीति और जनसरोकार के मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्यक्ष अनुभवों को विशेष महत्व मिलता है। वर्तमान में वे झारखंड दर्शन, खबर मन्त्र, स्वतंत्र प्रभात, अमर भास्कर, झारखंड न्यूज़24 एवं क्राफ्ट समाचार सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्वतंत्र लेखन एवं रिपोर्टिंग कर रहे हैं। साथ ही झारखंड न्यूज़24 में राज्य प्रभारी के रूप में संपादकीय एवं संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस जमीनी मुद्दे, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक विमर्श, आदिवासी समाज, राजनीति और जनहित से जुड़े विषयों पर रहा है। राजनीतिक संवाद एवं मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। शैक्षणिक रूप से हंसराज वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (2024–26) कर रहे हैं। साहित्यिक अध्ययन और पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव का समन्वय उनके लेखन को विषयगत समझ, सामाजिक संवेदना और प्रभावी भाषा प्रदान करता है। हजारीबाग के बरगड्डा गांव से आने वाले हंसराज वर्तमान में रांची में रहते हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े विषयों को व्यापक विमर्श तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं।
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