शरद पूर्णिमा पर संकट मोचन धाम में भजन-कीर्तन, महाआरती के बाद बंटा प्रसाद
वर्ष 2002 से प्रत्येक पूर्णिमा पर हो रहा धार्मिक आयोजन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
पाथरोल (देवघर)। सिद्धपीठ पाथरोल के कालीधाम स्थित संकट मोचन धाम में शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार देर रात भजन-कीर्तन और हनुमान जी की महाआरती का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। भजन गायकों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर और खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद भजन गायकों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। राजेश भारद्वाज, पूजा महतो, लाल्टू पाल, अजय भारती और रामजी रवानी ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से पूजा महतो की भजन प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। संगीत में पंकज पांडे ने नाल, पिंटू दास ने बैंजो, सुबल महतो ने ऑर्गन और गोलक महतो ने पैड पर संगत की।

वर्ष 2002 से प्रत्येक पूर्णिमा पर हो रहा आयोजन
संकट मोचन धाम में वर्ष 2002 से प्रत्येक पूर्णिमा पर भक्तों के सहयोग से भजन-कीर्तन, बाबा की महाआरती और खिचड़ी प्रसाद वितरण की परंपरा चली आ रही है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर भी इसी परंपरा के तहत धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंदिर प्रबंधक दिलीप पाठक ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के सहयोग से भजन संध्या और प्रसाद वितरण किया जाता है। भक्त अपनी स्वेच्छा से आर्थिक एवं अन्य सहयोग करते हैं, जिससे यह धार्मिक आयोजन निरंतर जारी है।
कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि बलवीर राय, मुखिया प्रतिनिधि संतोष साह, श्याम सिंह, राम भोक्ता, संतोष तुरी, संतोष पांडेय, मुकेश मिश्रा, नंदलाल तिवारी, महेंद्र तिवारी, किशुन साह, अमरनाथ पाठक, नवीन पाठक, मृणाल सिंह, गुड्डू सिंह और गोपाल यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के माधो मंडल, उपेंद्र रवानी, सुरेंद्र दास, संतोष पांडेय, अजय रवानी, सुभाष पोद्दार, रोशन कुमार, महेंद्र कुमार, अक्षय शर्मा, कारू रवानी, राजकिशोर, गुणधार मंडल, गुड्डू यादव, महेंद्र विश्वकर्मा, कामदेव रवानी, जटाशंकर राउत, कामदेव महतो, गुड़ा पंडित, वरुण बावरी, बलदेव रवानी, रवि रवानी, राजेश रवानी, मनोज यादव, हीरो यादव और उमा रवानी सहित ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।

