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विकास से कोसों दूर पालकोट के पांच गांव! बरसात में कट जाता है संपर्क, 2029 में वोट बहिष्कार का ऐलान

Aditya Ohdar
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विकास से कोसों दूर पालकोट के पांच गांव! बरसात में कट जाता है संपर्क, 2029 में वोट बहिष्कार का ऐलान


चार किलोमीटर कच्ची सड़क और नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीण परेशान, बीमारों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती; वर्षों से सरकारी पहल का इंतजार

आदित्य ओहदार |

पालकोट (गुमला)। विकास की बड़ी-बड़ी बातें और बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों का लंबा इंतजार—गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की बिलिंगबिरा पंचायत के पांच गांवों की यही कहानी है। यहां के ग्रामीण आज भी पक्की सड़क और नदी पर पुल की सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोइंधारा, लौखमहन, जमझरिया, चरखागोड़ी और बिलिंगबिरा रायटोली के लगभग 150 घरों के लोगों के लिए आवागमन एक गंभीर समस्या बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि जरूरी कामों के लिए भी गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, केरालोटी मुख्य पथ से इन गांवों को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क अब तक कच्ची है। वहीं, रास्ते में पड़ने वाली चुटिया डूबा नदी पर पुल नहीं होने से लोगों की परेशानी दोगुनी हो जाती है। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है और नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित होने लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि पांचों गांवों के लोगों का प्रखंड मुख्यालय पालकोट से संपर्क प्रभावित हो जाता है।

बारिश आते ही बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी

गांवों में रहने वाले लोगों के लिए बरसात का मौसम हर साल नई मुश्किलें लेकर आता है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर अपने काम निपटा लेते हैं, लेकिन तेज बारिश के दौरान नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। सड़क की खराब हालत के कारण बाइक और अन्य छोटे वाहनों से आवागमन भी कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई, किसानों के कृषि कार्य और ग्रामीणों के रोजमर्रा के जरूरी काम प्रभावित होते हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना आसान नहीं होता। कई बार मरीजों को खाट पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को भी इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि आपातकालीन स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ जाए, तो सड़क और पुल की कमी गंभीर समस्या बन जाती है।

अधिकारियों को आवेदन, विधायक के आश्वासन का भी इंतजार

ग्रामीणों का दावा है कि सड़क और पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी गई है। इस संबंध में पूर्व उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, स्थानीय विधायक भूषण बड़ा ने गांव का दौरा कर सड़क और पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।

लंबे समय से समस्या बनी रहने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना गांवों का समुचित विकास संभव नहीं है। आवागमन बाधित होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य जरूरी गतिविधियों पर असर पड़ता है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग उनकी समस्या को प्राथमिकता देते हुए निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए।

मांग पूरी नहीं हुई तो जिला मुख्यालय तक होगा आंदोलन

लगातार परेशानी झेल रहे ग्रामीणों ने अब अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और पुल निर्माण के लिए जल्द ठोस पहल नहीं की गई, तो चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़क जाम करने और उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने की भी चेतावनी दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिससे बरसात के दिनों में भी गांवों का संपर्क बना रहे और किसी मरीज, विद्यार्थी या किसान को आवागमन के लिए परेशान न होना पड़े।

‘रोड नहीं तो वोट नहीं’, 2029 के चुनाव से पहले रखी शर्त

सड़क और पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अब आगामी चुनाव को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि यदि वर्ष 2029 के चुनाव से पहले निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय ले सकते हैं। ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘रोड नहीं तो वोट नहीं।’

ग्रामीणों की यह चेतावनी बताती है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी अब उनके लिए केवल परेशानी का विषय नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने जवाबदेही का सवाल बन गई है। पांच गांवों के लोग जानना चाहते हैं कि आखिर कब तक उन्हें कच्ची सड़क और पुल के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीणों की मांग पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है और क्या इन गांवों को बरसात से पहले बेहतर आवागमन की सुविधा मिल पाती है। फिलहाल, पांच गांवों के ग्रामीण सड़क और पुल निर्माण की उम्मीद में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

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