हाता स्थित स्वाति सीमेंट प्लांट में विस्थापित ग्रामीणों का दुखनी सोरेन के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
महिला नेत्री सह समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में सैकड़ों विस्थापित रैयतदारों एवं ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2006 में लगभग 80 परिवारों ने रोजगार एवं अन्य सुविधाओं की उम्मीद में अपनी जमीन कंपनी को सशर्त दी थी। अब विस्थापित परिवार खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं,क्योंकि वर्षों बीत जाने के बावजूद जमीनदाता परिवार अपने हक और अधिकार के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कंपनी को दोबारा शुरू करने एवं नई कंपनी द्वारा अधिग्रहण की चर्चा के बीच ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग रखी कि पहले जमीनदाताओं के पुराने समझौते और उनके अधिकारों का समाधान हो, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया हो।
कंपनी प्रबंधन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। निर्धारित समय में वार्ता नहीं होने पर ग्रामीणों ने कंपनी में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।उन्होंने कहा हम औद्योगिक विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर जमीन देने वाले ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी भी स्वीकार नहीं होगी।
जमीन देने वालों को न्याय और सम्मान मिलना ही चाहिए।
इस अवसर पर शंकर मुंडा, राजेश बास्के (विस्थापित रैयतदार), रतन गोप, जादुपति गोप, राजेश प्रमाणिक, वृंदावन प्रमाणिक, संजय गोप, दिनेश गोप, शंभू पत्रो, मंटू पत्रो, गोपेश्वर गोप, सूरज गोप, दयाराम गोप, अजय गोप, विजय गोप, अमर गोप, लक्ष्मीकांत गोप, भोलेनाथ गोप, जगबंधु प्रमाणिक, बबलू गोप, मधु गोप, दुलाल साहू, जगदीश गोप एवं रविंद्र गोप सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।