झारखंड में 108 एम्बुलेंस सेवा पर संकट बरकरार! स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता बेनतीजा, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अड़े कर्मचारी
झारखंड न्यूज़24 ने पहले ही प्रमुखता से उठाया था एम्बुलेंस सेवा पर मंडराते संकट का मुद्दा, 40 घंटे की हड़ताल के बाद भी नहीं निकला समाधान, सिविल सर्जन के हाथों संचालन की मांग पर सरकार और संघ में ठनी
रांची | झारखंड न्यूज़24
झारखंड में 108 एम्बुलेंस सेवा को लेकर जारी गतिरोध खत्म होने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। मरीजों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को लेकर सरकार और आंदोलनरत कर्मचारियों के बीच शुक्रवार को हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। 40 घंटे की हड़ताल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मुख्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनकी लंबित मांगों पर सरकार कोई निर्णायक कदम उठाएगी, लेकिन करीब दो घंटे तक चली बैठक के बावजूद सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। अब झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों का उचित समाधान नहीं हुआ, तो 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ऐसे में एक बार फिर राज्य की आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

झारखंड न्यूज़24 ने पहले ही किया था आगाह
108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े इस संकट को झारखंड न्यूज़24 ने पहले ही प्रमुखता से प्रकाशित किया था। कर्मचारियों की 40 घंटे की हड़ताल, लंबित मांगों और 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी को सामने लाते हुए झारखंड न्यूज़24 ने इस मुद्दे की गंभीरता को प्रमुखता से उठाया था। खबर के माध्यम से यह बताया गया था कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो सकती है। अब स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई वार्ता के बाद भी गतिरोध बरकरार रहने से कर्मचारियों की चेतावनी और आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक, लेकिन नहीं बनी बात
शुक्रवार को नामकुम स्थित स्वास्थ्य मुख्यालय के आईपीएच सभागार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आंदोलनरत 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता हुई। लगभग दो घंटे तक चली इस बैठक में कर्मचारियों की लंबित मांगों, वेतन भुगतान, बर्खास्त कर्मियों की बहाली और एम्बुलेंस सेवा के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवा को बाधित करने पर नाराजगी जताई। वहीं, कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख भी दिखाया। हालांकि, एम्बुलेंस सेवा के संचालन को लेकर संघ की सबसे महत्वपूर्ण मांग पर सहमति नहीं बन सकी। सरकार और कर्मचारी संघ के बीच इसी मुद्दे पर गतिरोध कायम रहा।
निजी एजेंसी बनाम सिविल सर्जन: इस मांग पर आमने-सामने सरकार और संघ
आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन निजी एजेंसी के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराया जाए। संघ का मानना है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान, वेतन भुगतान और सेवा संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने आंदोलनरत कर्मचारियों को यह भी सलाह दी कि वे ब्लैकमेलिंग न करें और किसी के राजनीतिक औजार न बनें। दूसरी ओर, संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन कर्मचारियों के लंबित वेतन, सेवा संबंधी समस्याओं और श्रमिक अधिकारों को लेकर है। इस तरह वार्ता के बाद भी सेवा संचालन के मॉडल पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
वेतन भुगतान के दस्तावेजों पर उठे सवाल, जांच की मांग
बैठक में सम्मान फाउंडेशन कंपनी की ओर से कर्मचारियों के वेतन भुगतान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। लेकिन इन दस्तावेजों को लेकर संघ ने गंभीर सवाल उठाए। संघ के नेताओं ने जुलाई और अगस्त 2026 के वेतन भुगतान से संबंधित प्रमाणों को कथित रूप से फर्जी बताते हुए उनकी सत्यता की जांच कराने की मांग की।
संघ का आरोप है कि कंपनी की ओर से भुगतान के जो प्रमाण प्रस्तुत किए गए, उनकी वास्तविकता की पुष्टि आवश्यक है। नेताओं के अनुसार, जब कर्मचारियों को वेतन भुगतान को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तब केवल दस्तावेज प्रस्तुत कर देने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। संघ ने वेतन भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और लंबित राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
बर्खास्त कर्मियों की बहाली से लेकर श्रमिक अधिकारों तक, इन मांगों पर अड़ा संघ
झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगों में 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराना, बर्खास्त कर्मचारियों की पुनर्बहाली और लंबित वेतन का भुगतान शामिल है। इसके साथ ही संघ सभी कर्मचारियों को श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार और अन्य वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है।
संघ के नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान किए बिना आंदोलन समाप्त करना संभव नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत जरूर मिले, लेकिन सभी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
नीरज तिवारी का दोटूक ऐलान: मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे
झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए वार्ता हुई, लेकिन सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी कारण संघ ने अपना आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की लंबित मांगों का उचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संघ ने 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा को भी दोहराया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संघ के बीच सहमति बनाने की चुनौती बनी रहेगी।
21 अक्टूबर पर टिकी निगाहें, सरकार के सामने समाधान की चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार 21 अक्टूबर से पहले कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकाल पाएगी या झारखंड को एक बार फिर 108 एम्बुलेंस सेवा में बड़े व्यवधान का सामना करना पड़ेगा। एम्बुलेंस सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति बनने पर मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल, 40 घंटे की हड़ताल के बाद हुई वार्ता से भी कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकलने के कारण विवाद बरकरार है। एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के सामने आवश्यक स्वास्थ्य सेवा को सुचारु बनाए रखने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की चुनौती है। अब देखना होगा कि 21 अक्टूबर की समयसीमा से पहले दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं या आंदोलन राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील हो जाता है।

