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मां मनसा पूजा पर केरकेट्टा में ओड़िया नाटक ‘लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’ का हुआ विमोचन

Suresh Mahapatra
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मां मनसा पूजा पर केरकेट्टा में ओड़िया नाटक ‘लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’ का हुआ विमोचन

 

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मां मनसा पूजा पर केरकेट्टा में ओड़िया नाटक ‘लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’ का हुआ विमोचन मां मनसा पूजा के पावन अवसर पर रविवार को केरकेट्टा में मां मनसा ओपेरा, केरकेट्टा द्वारा प्रस्तुत ओड़िया नाटक *’लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’* का भव्य विमोचन किया गया। नाटक का विमोचन विधायक संजीव सरदार एवं समाजसेवी पिंटू गुप्ता के कर-कमलों द्वारा किया गया।इस नाटक का लेखन नाट्यकार नवीन कुमार महापात्र ने किया है, जबकि निर्देशन उदय कुमार मुर्मू और नृत्य निर्देशन जीतू भाई ने किया है।इस अवसर पर विधायक संजीव सरदार ने कहा “मां मनसा की आराधना हमारी आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक है। ऐसे पावन अवसर पर हमारी अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े नाटक का विमोचन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।उन्होंने आगे कहा, “नाटक, मातृभाषा और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है। यह नाटक हमारे युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ेगा। ‘लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’ शीर्षक ही अपने आप में जीवन के संघर्ष को दर्शाता है। यह नाटक निश्चित रूप से दर्शकों के दिलों को छुएगा। उन्होंने कहा पोटका विधानसभा क्षेत्र की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मैं हमेशा आप सबके साथ खड़ा हूं।नाटक की कहानी और संदेश:नाटक की कहानी बड़े भाई गोविंद और उसकी पत्नी तुलसी के त्याग पर आधारित है। गोविंद और तुलसी अपने दोनों छोटे भाइयों मोहन और महेश को कष्ट सहकर पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाते हैं, लेकिन अंत में दोनों छोटे भाई बड़े भाई का तिरस्कार करते हैं।खून से लिखी किस्मत की रेखा कभी नहीं मिटती। बड़ा भाई भले ही गरीब रह गया, पर उसके त्याग और बलिदान की रेखा भगवान के घर में लिखी गई। काबिल वह नहीं जो ज्यादा कमाता है, काबिल वह है जो अपनी जड़ों को याद रखता है। आज हर दूसरे घर की यही कहानी है, जहां मां-बाप और बड़ा भाई अपना पेट काटकर छोटों को काबिल बनाते हैं और वही बड़े होकर उन्हें बोझ समझने लगते हैं।नाटक में पुरुष चरित्र (केरकेट्टा के यूवा वर्ग)व महिला चरित्र, डेकोरेशन, ध्वनि, साज-सज्जा एवं साउंड में उड़ीसा स्थित बारीपदा के कलाकारों ने अपनी भूमिका निभाई। पुरुष चरित्रों की कलाकारी का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया।कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम प्रधान, आयोजक समिति के अध्यक्ष शसधर प्रधान, उपाध्यक्ष लाल बहादुर पुराण एवं गांव के बुजुर्गों तथा युवाओं की मुख्य भूमिका रही।

 

पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट

 

 

 

पोटका के कला संस्कृति को बचाए रखने की सराहनीय प्रयास- विधायक संजीव सरदार

 

 मां मनसा पूजा के पावन अवसर पर रविवार को केरकेट्टा में मां मनसा ओपेरा, केरकेट्टा द्वारा प्रस्तुत ओड़िया नाटक *’लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’* का भव्य विमोचन किया गया। नाटक का विमोचन विधायक संजीव सरदार एवं समाजसेवी पिंटू गुप्ता के कर-कमलों द्वारा किया गया।

इस नाटक का लेखन नाट्यकार नवीन कुमार महापात्र ने किया है, जबकि निर्देशन उदय कुमार मुर्मू और नृत्य निर्देशन जीतू भाई ने किया है।

इस अवसर पर विधायक संजीव सरदार ने कहा “मां मनसा की आराधना हमारी आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक है। ऐसे पावन अवसर पर हमारी अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े नाटक का विमोचन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने आगे कहा, “नाटक, मातृभाषा और संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है। यह नाटक हमारे युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ेगा। ‘लहुरे लेखा मो कपालो रेखा’ शीर्षक ही अपने आप में जीवन के संघर्ष को दर्शाता है। यह नाटक निश्चित रूप से दर्शकों के दिलों को छुएगा। उन्होंने कहा पोटका विधानसभा क्षेत्र की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मैं हमेशा आप सबके साथ खड़ा हूं।

नाटक की कहानी और संदेश:

नाटक की कहानी बड़े भाई गोविंद और उसकी पत्नी तुलसी के त्याग पर आधारित है। गोविंद और तुलसी अपने दोनों छोटे भाइयों मोहन और महेश को कष्ट सहकर पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाते हैं, लेकिन अंत में दोनों छोटे भाई बड़े भाई का तिरस्कार करते हैं।

नाटक का मुख्य संदेश है –

खून से लिखी किस्मत की रेखा कभी नहीं मिटती। बड़ा भाई भले ही गरीब रह गया, पर उसके त्याग और बलिदान की रेखा भगवान के घर में लिखी गई। काबिल वह नहीं जो ज्यादा कमाता है, काबिल वह है जो अपनी जड़ों को याद रखता है। आज हर दूसरे घर की यही कहानी है, जहां मां-बाप और बड़ा भाई अपना पेट काटकर छोटों को काबिल बनाते हैं और वही बड़े होकर उन्हें बोझ समझने लगते हैं।

नाटक में पुरुष चरित्र (केरकेट्टा के यूवा वर्ग)व महिला चरित्र, डेकोरेशन, ध्वनि, साज-सज्जा एवं साउंड में उड़ीसा स्थित बारीपदा के कलाकारों ने अपनी भूमिका निभाई। पुरुष चरित्रों की कलाकारी का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया।कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम प्रधान, आयोजक समिति के अध्यक्ष शसधर प्रधान, उपाध्यक्ष लाल बहादुर पुराण एवं गांव के बुजुर्गों तथा युवाओं की मुख्य भूमिका रही।

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