February 25, 2024
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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने मनाई विश्व पर्यावरण दिवस

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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने मनाई विश्व पर्यावरण दिवस

पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन का अंग विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न

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पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता की जरूरत : कुलपति डॉ सविता
विकास के लिए आवश्यकताओं को सीमित कर प्रकृति संरक्षण करने की जरूरत: डॉ प्रशेंजित

पर्यावरण संरक्षण के लिए अंधकार में दीपक जलाने की जरूरत : गुरुशरण प्रसाद

संवाददाता- कृष्णा कुमार

हजारीबाग- पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता की जरूरत है। समाज में जागरूकता शिक्षित समाज से ही संभव है। मात्र पांच जून को पर्यावरण दिवस का आयोजन करने से नहीं , बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहना होगा, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी हमारा नाम लेंगे। उक्त बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, झारखंड के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर रविवार को आयोजित ‘पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन का अंग’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार की बतौर अध्यक्षता करते हुए रांची स्थित झारखंड राय युनिवर्सिटी के कुलपति डॉ सविता सेंगर ने कही।उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए मात्र वृक्षारोपण करना ही नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना जरूरी है। वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता पाकुड़ कॉलेज के वनस्पतिशास्त्र विभाग के डॉ प्रशेंजित मुखर्जी ने कहा कि विकास के लिए आवश्यकताओं को सीमित कर प्रकृति संरक्षण करने की जरूरत है। आवश्यकता की पूर्ति के लिए जल, जंगल और जमीन से हमें वायु एवं जल मिलती है। प्रकृति से मुफ्त में प्राप्त संसाधनों का हम मोल नहीं समझते हैं, जिसका हम मोल नहीं समझते हैं, उसके उत्पत्ति पर हमें ध्यान देकर उक्त संसाधनों का दोहन नहीं कर संरक्षण करने की जरूरत है , तभी हमारा पर्यावरण संरक्षित रहेगा। आज पर्यावरण दिवस के 50 वर्ष बीतने पर भी स्थिति जहां की तहां है। इसपर हमें ध्यान देना होगा। पर्यावरण प्रदूषण के लिए पृथ्वी पर एकमात्र मनुष्य ही दोषी है। वेबिनार में बतौर विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सेवा संघ के ट्रस्टी गुरुशरण प्रसाद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन का अंग है। इसे संरक्षित करने के लिए अंधकार में दीपक जलाने की जरूरत है। वेबिनार का संचालन एवं विषय प्रवेश कराते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ ललिता राणा ने कहा कि पर्यावरण का अर्थ परि आवरण होता है, अर्थात शरीर अथवा प्रकृति का आवरण नष्ट होने से प्रदूषण होता है। वेबिनार में धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के झारखंड प्रांत के संयोजक अमर कांत झा ने किया। वेबिनार की शुरुआत ऊं मंत्र से तथा समापन शांति मंत्र से किया गया। इस वेबिनार में मुख्य रूप से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के झारखंड के सह संयोजक सह रांची स्थित सरला बिरला युनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ विजय कुमार सिंह, न्यास के डॉ अखोरी गोपाल जी सहाय, मार्खम कॉलेज, हजारीबाग के प्रोग्राम ऑफिसर भोलानाथ सिंह रश्मि सिन्हा, रश्मि गुप्ता, श्यामसुंदर जैन, डीके मिश्रा, अमित कुमार सिंह, गीता कुमारी, न्याय के संयोजक सह रजरप्पा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के अध्यापक महेन्द्र प्रसाद सिंह समेत कई प्रतिभागीगण उपस्थित थे।

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