February 24, 2024
Jharkhand News24
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भूमि के बदले मुआवजा,नौकरी लेने हेतु ऑफिस की ठोकरें खा रहे हैं आम्रपाली के भू-दाता

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परियोजना खुले नौ वर्ष होने के बाद भी नौकरी-मुआवजा से वंचित हैं भू-रैयत:-विस्थापित नेता राजेन्द्र प्रसाद

भूमि अधिग्रहण 2003 में पाँच गांवों में किमरांगकला, कुमरांगखुर्द, बिंगलात, उड़सू,होन्हे को पूर्ण कर कुछ भूमि की  अधिग्रहण 2017 में किया गया था।

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आम्रपाली कोल परियोजना के एलएनआर विभाग में अधिकारी को कई वर्षों से काबिज होने से भू-दाता का कार्य नहीं हो पा रहा है:- जिला परिषद सदस्य, देवन्ती देवी

झारखण्ड न्यूज24

संवाददाता

टंडवा:-(चतरा) आम्रपाली कोल परियोजना में भूमि से हर रोज 50 हजार टन  से भी ज्यादा कोयला उत्पादन कर करोड़ो रूपये मुनाफा कमाने वाली आम्रपाली कोल परियोजना से आज विस्थापित रैयत भूमि के बदले मुआवजा के लिये ऑफिस की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इस परियोजना से प्रभावित होन्हें गांव के 50 किसानों ने वर्ष 2019 से 2022 तक मुआवजा भुगतान की आवेदन दिया। पर आजतक उनमें से किसी को भी एक रूपया मुआवजा भुगतान 3 से 4 वर्षों  होने के बाद भी नहीं मिल पाया। जबकि इसके अलावा ग्राम उड़सू,कुमरांगकला, कुमरांगखुर्द,बिंगलात एवं अन्य गांव के जमीन अधिग्रहित किये गये हैं।जिसमें कुछ हीं रैयतों को नौकरी सीसीएल परियोजना से मिल पाया है।वैसे भू-दाता द्वारा नौकरी,मुआवजा लेने के लिए बहुत ऐसें भी विभाग में फाइल किया गया है लेकिन ऑफिस में जंग लग रहा है,और अधिकारियों द्वारा बहना बाजी कर रैयतों को नौकरी, मुआवजा लेने में काफ़ी उलझाने की बात समाने आया है।कुछ मामले में कुछ को नौकरी देना,और कुछ वही मामले में वंचित कर देना एक बहुत बड़ा षड्यंत्र का जन्म दे रहा है जो जाँच का विषय है । जिसके चलते नौकरी, मुआवजा की फाइलें 4 से 6 वर्ष होने के बाद भी सीसीएल के महाअधिकारीयों द्वारा निष्पादन नहीं किया गया है।जिसकी जाँच के लिए विस्थापित नेता सह समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद साव के द्वारा सीसीएल विभाग को अवगत कराने की बात कही है।अगर इस पर करवाई नहीं करने पर उच्च स्तरीय जांच करते हुए मांग की जाने की बात कही है।जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में हीं आम्रपाली के पांच गांव के रैयती जमीनों के मुआवजा भुगतान के लिये कोल इंडिया ने 53 करोड़ मुआवजा सेंक्शन देने की बात बताई गई है। उसमें से कुछ किसानों के बीच मुआवजा जरूर वितरण हुए पर होन्हें गांव के कुछ किसानों ने जमीन के बदले नौकरी लेने के बाद मुआवजा के लिये आवेदन दिया। वह दस्तावेज भू-संपदा विभाग में धूल फांक रहा है। साल 2019 से अब तक कितने अधिकारी आये और आम्रपाली से गये और पोस्टिंग पा कर चलतें बने पर किसी अधिकारी द्वारा सुध नहीं लिया। ग्रामीणों ने बताया कि जिन किसानों ने मुआवजा के लिये आवेदन दिया। उसमें चार एकड़ के मालिक दशरथ गंझू, भरत गंझू, तेतरी देवी, मुनिया देवी, अजय कुमार समेत 49 किसानों ने सीसीएल के भू-संपदा पदाधिकारी को आवेदन दिया पर मुआवजा नहीं मिला है। बताते चलें कि सीसीएल हर दो एकड़ रैयती भूमि  पर एक परिवार को नौकरी और लगभग 18 लाख मुआवजा भुगतान करती है। मुआवजा के लिये आवेदन देने वाले यमुना प्रयाद यादव ने बताया कि 1.9 एकड़ मुआवजा के लिये 14 जुलाई 2021 को आवेदन किया था,पर मुआवजा आज तक नहीं मिले। दूसरी ओर कुछ माह पूर्व कार्यभार संभालने वाले प्रोजेक्ट ऑफिसर पीके सिन्हा ने कहा की मुआवजा भुगतान संबंधी जमीनों की पूरी दस्तावेज जमा है। उनका भुगतान कर दिया गया है। जिनमें कुछ कमी है। जो कुछ कारणों से रूका होगा, वैसे विभाग से अद्यतन रिपोर्ट मांगा गया है।

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